Friday, September 6, 2013

बाबुजी की २०-वीं पुण्य तिथि

आज बाबुजी की २०-वीं पुण्य तिथि है! घर में आज उपवास, पूजन और हवन है! बाबुजी को यादकर के उनकी सेवा में खुद को समर्पित करने और उनसे आशीर्वाद के लिए मैंने एक प्रार्थना लिखी हुई है, मुझे संस्कृत लिखना नहीं आता, सो जो भी मन में आया, अपनी बोली में ही लिख दिया। 
क्या भगवान् सिर्फ संस्कृत ही समझते हैं? 
मेरी लिखी यह प्रार्थना ३-साल पुरानी है। मुझे नहीं लगता कि इसमें(प्रार्थना के निवेदन में) कुछ सुधार की जरूरत है! या कुछ और जोड़ने और घटने की जरूरत है! मैंने अपने बाबुजी से हमेशा इसी प्रकार निवेदन किया, और आज फिर करता हूँ _
समय ०९:४५ (AM)     लोहरदगा      ०६,सितम्बर,२०१३ 
हमारे परमपूज्य प्रिय बाबुजी की २०-वीं पुण्य तिथि 
श्रीमाद्पद्मपुराण अध्याय ४७ के नौवें श्लोक में ब्रम्हर्षी व्यास जी ने कहा है :
"पिता धर्मः पिता स्वर्गः पिता हि परमं तपः। 
पितरि प्रीतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्व देवता: ।।"

 पिता धर्म है, पिता स्वर्ग है और पिता ही सर्वोत्कृष्ट तपस्या है। पिता के प्रसन्न हो जाने पर सम्पूर्ण देवता प्रसन्न हो जाते हैं!
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हमसभी के तरफ से पूज्यवर बाबुजी से की गई मेरी प्रार्थना :
"आज बाबुजी की २०-वीं पुण्य तिथि है। उनको खोने का दिन। उनको याद करने का दिन। उनके दिव्य व्यक्तित्व को याद करने का दिन। उनकी बातों को याद करने का दिन। उनके आदर्शों को याद करने का दिन। उन्हें श्रद्धा से प्रणाम करने का दिन। उनकी पूजा करने का दिन। उनसे विनती करने का दिन। उनसे आशीर्वाद पाने का दिन। उनसे अपनी शिकायतें कह डालने का दिन। उनसे अपनी तकलीफें और संताप को साझा कर उनसे रक्षा सुरक्षा और संरक्षण के लिए निवेदन करने का दिन। उनसे रूठने का दिन। उनको मनाने का दिन। उनको प्यार करने का दिन। उनसे प्यार पाने का दिन। उन्हें अपना सर्वस्व अर्पण करने का दिन। उनसे उनका सर्वस्व पाने का दिन। जो नहीं पा सके उसे भूलकर उन्हीं का होकर उन्हें पा लेने का दिन। उनकी सतुति, स्मृति, प्रार्थना और सेवा से पूर्ण समर्पित होकर एक याचक की तरह उनसे निवेदन और प्रार्थना करने का दिन। उन्हें सदा अपने साथ होने के अहसास को महसूस करने का दिन। 
।।ॐ श्री पितृदेवेभ्यो नमः त्वम् पाहिमाम शरणागतम।। 
हम आपके बच्चे हैं, और आपके शरणागत हैं। कृपाकर हमें अपनी शरण में लीजिये। अपनी कृपा हमपर बनाये रखिये। हमारी भूलों, गलतियों, नादानियों, अपराधों को हमपर दयाकर के हमें क्षमा कीजिये। हमारे द्वारा आपकी की गई पूजा को स्वीकार कर हमें उपकृत कीजिये। हमपर प्रसन्न होकर हमें अपना आशीर्वाद दीजिये। हमें प्रगति, उन्नति, तरक्की, समृद्धि, शांति, सदभाव, भाईचारे और परस्पर निश्छल प्रेम और अपनी ममतामई भक्ति का पावन आशीर्वाद दीजिये। हम आपके बच्चे हमारी पूज्य माता सहित आपको विनीत और विनयावनत होकर श्रद्धा और प्रेम से आपको सादर प्रणाम कहते हैं।"
-="आपका अपना परिवार"=-
माँ 
श्रीकांत -वीणा 
शशि - पुष्पा 
कमल - रूपा 
प्रितीश{आपका पोता 'बुचुलिया' आज इंजिनियर बन गया!}
क्षितिज{आपका पोता इंजीनियरिंग की पढ़ाई में आगे बढ़ रहा है।}
गोविन्द{शशि का बेटा, आपका पोता दिल्ली यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत है!}
अतुल (लड्डू){आपका पोता बोकारो में 10+2 की पढाई कर रहा है, जिसे आपके विशेष आशीर्वाद की आवश्यकता है, कृपा कर उसे शक्ति दीजिये!}
शरिष्ठा(गुनगुन){आपकी पोती, हमारे घर की गुड़िया, राँची विशॉपवेस्टकॉट स्कूल में प्रगति शील है।}
यथार्थ(डुग्गु){आपका नन्हा पोता आपके आशीर्वाद के लिए आपही की शरण में है!}  
और आपके १६ (सोलह) नाती-नतिनी भी श्रद्धा से आपको प्रणाम बोल रहे हैं!
हे, बाबुजी! हमारा मार्ग प्रशस्त कीजिये। 
सदा हमारा मार्गदर्शन करते रहिये। 
सदा हमारे अंग-संग रहिये। 
आपको हमसभी का प्रणाम प्रणाम प्रणाम। 
  ~आपका बेटा~ 
श्रीकांत (बबुआ)  
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06th SEPTEMBER 2013
हो गई पूजा की तैयारी! देखो अईया और बाबुजी को!!
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-प्रणाम-
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