Friday, August 30, 2013

क्या कोई जिम्मेवारी बनती है या नहीं??

साथियों !
दिल्ली गैंग रेप (दामिनी केस) को आज आठ महीने हो गए! इन आठ महीनों में "जहीनों" ने कई लेख काव्य गद्य एवं रचनाएँ रच डालीं! सुधि जनों ने इंडिया गेट के सामने मोमबत्तियाँ जलाकर इतिहास रच दिया कि वे पीडिता के साथ हैं! सरकार और पुलिस की जमकर भर्त्सना की गई! पब्लिक से जितना विरोध बन पड़ता था विरोध हुआ!
पर सब बेकार!
उस दिन से लेकर अभी तक ऐसा एक दिन भी उदाहरण नहीं बना जब कोई नया बालात्कार नहीं हुआ हो! रोज अखबारों में बमय सुबूत -गैंग रेप- के समाचार छप रहा है! आग है, तभी तो धुंआ उठ रहा है!! किसी को अनुमान है, कि कब जाकर बंद होगा यह दुष्कर्म का सिलसिला??
दोस्तों, कोई ऐसा दिन नहीं और कोई ऐसा अखबार नहीं जिसके १५ पन्नों में पाँच गैंग-रेप का समाचार न छपता हो! रोज रोज गैंग-रेप एक नियम और रूटीन अनुसार होना जैसे इस देश की नियति बन गया है! हम और आप क्या कर लेंगे, यदि सरकार और पुलिस भी लाचार हो गई है!?? हर कोई लड़कियों को ही दोषिवार ठहराते हैं कि वे भड़काऊ और उकसाने वाली फैशन और वस्त्र पहनती हैं! किसी को किसी पीडिता से वास्तविक सहानुभूति नहीं, सिर्फ एक समाचार बनकर रह गया है! पढ़ा और फेंक दिया! जिम्मेदारी ख़तम!
बेटी किसके घर में नहीं?
बहन किसके घर में नहीं?
हमें वजूद में लाने वाली माँ किस घर में नहीं?
औरत के रूप में माननीय महिला किसके घर में नहीं?
पर हम चिंता व्यक्त करने के अलावे कुछ और कर पाने के काबिल हैं??
क्या हम ईश्वर के अवतार की प्रतीक्षा में हैं, जो आपकी, हमारी और सबकी लड़ाई लडेगा??
सरकार और पुलिस से क्या उम्मीद करें कि वह हर लड़की को एक बॉडीगार्ड मुहैया करवाए, जो असंभव है??
बिना एक भीड़ बने, क्या हममे इतनी कूवत और सलाहियत है कि हम खुद दोषी रेपिस्ट को दण्ड दे सकें??
आदि काल से प्रारंभ यह अत्याचार अब एक महामारी के रूप में सामने हैं!
जो घटना मिडिया ने बतलाई वहीँ जान पाए! जो समाचार नहीं बना उसकी कोई गिनती है??
क्या यह भयावह भविष्य की नंगी तस्वीर नहीं??
हमें -आपको और सभी को- जो इस ज़ुल्म के विरोध में हैं, क्या और कैसे करना चाहिए??
कुछ करो, भाईयों!
facebook पर अपने book का face दिखलाने के अलावे कोई और जिम्मेवारी हमारी है, तो सुधिजन, हे साथियों, सहायता करो!
अपनी बहन की
अपनी बिटिया की
वो संकट में हैं!!
आप ही उसके पालनहार और रक्षक हो!
कोई भगवन अवतार नहीं लेने वाला!
कोई फ़िल्मी हीरो शूटिंग छोड़कर हमारी रहनुमाई नहीं करने वाला।
और, सरकार तथा पुलिस से उम्मीद छोड़ दीजिये, क्योंकि रेपिस्ट में कोई इंस्पेक्टर का बेटा या मंत्री का संत्री या नेता का बेटा भी शामिल होता है, जिसके बेशुमार समाचार रोज छप रहे हैं!
क्या हो गया है देश के नवयुवकों को?_जो वे बालात्कार के लिए "गैंग" बनाते हैं?? बियर, शराब के बिना इनका कोई दिन नहीं बीतता! बार एंड रेस्टुरेंट तो छोड़िये ये ठेके के ठर्रे तक को मुँह से लगाए हुए हैं! नशाखोरी में ये खुद को भूल कर हैवान और वहशी बन गए हैं!
कुछ तो करना ही पड़ेगा इनका।
अन्यथा अगला निशाना हम भी हो सकते हैं!
अति की अति से भी ज्यादा अति हो गई है! टीवी और अखबार को चस्के और चठ्कारे के साथ देखा पड़ा जा रहा है!
क्या आप दुर्भेद्य किले में हैं?
क्या आप स्वछन्द नहीं घूमेंगे?
हमारी बच्चियाँ क्या नहीं चहचहायेंगी??
इनकी जीवन पर ग्रहण लगाने वाले लम्पटों से कैसे निपटा जाय कोई उपाय हो तो, संगठित होईये!
समाचार न हुआ रेप का प्रचार हो गया!
इस हालत में कोई जश्न और हंसी खोखली लगती है! जब-जब दिल्ली निशाना बनता है, आन्दोलन आवश्यक समझा जाता है! सुदूर प्रांत में उससे भी विभत्स काण्ड को सुन-देखकर उपेक्षा की जाती है! इसमें और ऐसी दुर्दशा की दुर्गम स्थिति में आप खुद कितने सुरक्षित हैं, सोचना होगा! कल को आपको पता चले कि श्रीकांत तिवारी के साथ कुछ अन्याय हुआ है, तो कौन कौन मेरी सहायता के लिए उपलब्ध होगा?? कल को मुझे पता चले की मेरे किसी fb मित्र के साथ अनहोनी और ज़ुल्म हो गया है, तो मेरी क्या कोई जिम्मेवारी बनती है या नहीं??

जय हिन्द !