Saturday, April 6, 2013

यथार्थ

यथार्थ तो यह है कि, नहीं लगता इस वर्ष मुझे कंघी की जरूरत पड़ने वाली है! उगते बालों के ये 'मेरा धर्मेन्द्र' जिसका नामकरण रिकार्ड्स के लिए "यथार्थ" तय किया गया; को नोच डालता है!! अभी इसे मेरे चश्मे से लगाव हो गया है! यूँ बेरहमी से उसे नोचता है कि लगता है ...गया ! मेरी खानाबदोश सी ज़िन्दगी में ऐसे लम्हे चुराने तक की कोई गुंजाइश नहीं इसलिए 'डाका' डालना पड़ता है! डुग्गु = मेरा धर्मेन्द्र= आप सभी का "-यथार्थ-" !! कल [05/APRIL/2013 को]इसकी पहली वर्षगाँठ थी! मैं निक्की का शुक्रगुजार हूँ जिसने मुझे यह नाम सुझाया! यथार्थ! ... फिर भी ये मेरा धर्मेन्द्र ही रहेगा! अब इसके माँ-बाप और दुनिया जो चाहें इसे बुलाएं!


























इस मौके पर बच्चों ने SLIDESHOW का प्रोग्राम रखा था; जिसे उन्होंने खुद तैयार किया था, जो एक साल में बढ़ते डुग्गु की कहानी है; इसमें शामिल होने केलिए मुझे कल "-भारतीय रेल की जनरल-" बोगी द्वारा रांची जाना पड़ा और फिर ......लौटना भी पड़ा!

_श्री .