Tuesday, April 2, 2013

इतना तो याद है मुझे

राजेश खन्ना कार चला रहे हैं और मैं...?  मैं भीनी-भीनी बरसात में मोटरबाइक चला रहा हूँ ...

इतना तो याद है मुझे ...
हो ओओ ...!!
इतना तो याद है मुझे,
हाये ये ....
इतना तो याद है मुझे,
के उनसे मुलाकात हुई ...
इतना तो याद है मुझे,
के उनसे मुलाकात हुई ...
बाद में जानें क्या हुआ ...
हो ओ ओ ...
बाद में जानें क्या हुआ,
हाये ये ....
बाद में जानें क्या हुआ,
ना जाने क्या बात हुई...
बाद में जानें क्या हुआ,
ना जाने क्या बात हुई...
इतना तो याद है मुझे ...
ओ ओ ओ ...

वादे वफ़ा के,
करके कसमे उठाके के
किसी पे दिल झुक के
चला आया ....
नज़रें मिलाके,
नींद अपनी गंवा के,
कसक दिल में बसा के
चला आया ....
दिन तो गुज़र जाएगा,
हो ओ ओ ...
दिन तो गुज़र जाएगा, 
हाये ये ....
दिन तो गुज़र जाएगा,
क्या होगा जब रात हुई ...
दिन तो गुज़र जाएगा,
क्या होगा जब रात हुई ...
इतना तो याद है मुझे ...

मारे हया के,
मैं तो आँखें झूका के,
ज़रा दामन बाच के
चली आई ...
पर्दा हटा के,
उनकी बातों में आके,
उन्हें सूरत दिखाके
चली आई ...
किससे शिकायत करूँ ...
हो ओ ओ ...
किससे शिकायत करूँ,
हाये ये ....
किससे शिकायत करूँ,
शरारत मेरे साथ हुई ...
किससे शिकायत करूँ,
शरारत मेरे साथ हुई ...
इतना तो याद है मुझे ...

...ओ ...ओ ...ओ
आ आ ओ ओ ...
थी इक कहानी,
पहले ये जिंदगानी,
उन्हें देखा तो जीना मुझे आया ...
दिलबर ओ जानी,
शरम से पानी पानी, थी मैं
बस्स पसीना मुझे आया ...
ऐसे मैं भीग गई,
हो ओ ओ ...
ऐसे मैं भीग गई,
हाये ये ....
ऐसे मैं भीग गई ...
जैसे के बरसात हुई ...
ऐसे मैं भीग गई ...
जैसे के बरसात हुई ...
इतना तो याद है मुझे ...
हो ओओ ...!!
इतना तो याद है मुझे,
हाये ये ....
इतना तो याद है मुझे,
इतना तो याद है मुझे,
के उनसे मुलाकात हुई ...
इतना तो याद है मुझे,
हो ओओ ...!!
इतना तो याद है मुझे,
इतना तो याद है मुझे,
इतना तो याद है मुझे,
http://www.youtube.com/watch?v=1wF9LwfbJcc
_श्री . 

नीलकंठ

हमारे शहर (!?!) के सबसे पुराने, ...सबसे पुराने चाय-नाश्ते की एक दूकान अभी भी अपने उसी पुराने स्वरुप में है जिसे मैं अपनी यादाश्त के मुताबिक पिछले 40 वर्षों से देखता आ रहा हूँ! इसके पहले मालिक स्वर्गीय माधव चन्द्र दास (बंगाली) उर्फ़ "माधो दादा" थे! परसों मैं उनके यहाँ चाय-नाश्ते के लिए बैठा था कि मेरी नज़र धुवें से काली पड़ चुकी दीवाल पर टंगी भगवान्  के इस तस्वीर पर पड़ी! मैंने अपने मोबाइल कैमरे से उसकी चार तस्वीरें खींचीं; उनमें से जो बेहतर लगा उसपर मैंने अपनी कल्पनानुसार कंप्यूटर पर कुछ प्रयोग किया जिसका हासिल ::> मेरे प्रभु "नीलकंठ" प्रकट भय !! 
भगवान् की जटाओं पर का 'चन्द्रमा', और उनका 'नीला'कंठ मैंने बनाया है! देखिये समूची-सारी दुनिया की बुराइयों के "विष" को धारण करने वाले मेरे प्रभु के कंठ की नीली "आभा"(the Tint) को देखिये!! भगवान् ने इस विष को कंठ में ही रोक लिया जिसके परिणामस्वरूप उनका कंठ नीला हो गया, और वे "नीलकंठ" कहलाये!
 "ॐ नमः शिवाय!!"
 _श्री .

in between ...THE SECRET OF THE NAGAS continued...

SHIVA TRILOGY (PART 2) THE SECRET OF THE NAGAS के उस स्थान पर हूँ जहाँ राजा दिलीप के साम्राज्य 'स्वद्वीप' की राजधानी 'अयोध्या' से गंगा तट के किनारे बसे 'काशी' नगर की यात्रा बस शुरू होने ही वाली है। शिव ने राजकुमार भगीरथ की प्राण रक्षा की, जब उसका घोडा बेकाबू होकर बेतहाशा एक ऐसी खतरनाक चढ़ाई की तरफ भाग रहा है जिसके बाद उफनती सरयु नदी की ओर गहरी खाई है! ...भागीरथ, शिव का मित्र बन जाता है। ..... शिव ने पर्वतेश्वर को यात्रा की कमान और सभी जिम्मेवारियां सौंप दीं हैं! पर्वतेश्वर राजकुमारी आनंदमइ से पूछने आते हैं, यदि उनकी कोई ख़ास इच्छा हो! आनंदमइ पर्वतेश्वर से कहतीं हैं कि यात्रा के दरम्यान वो उस स्थान पर जाकर भगवान् श्रीराम की पूजा करना चाहतीं हैं जहाँ ऋषि विश्वामित्र ने उन्हें और भ्राता श्रीलक्ष्मण जी को अमोघ शष्त्रों की शिक्षा दे कर कई शष्त्र प्रदान किये थे; और जहाँ प्रभु श्रीराम ने ""ताड़का"" नामक राक्षषी का वध किया था! .....मित्रों यह स्थान, तड़का वध स्थल, अभी भी कायम है और यह बिहार राज्य के "बक्सर" [http://hi.wikipedia.org/wiki/बक्सर]शहर में गंगा के किनारे है जहाँ रोजीना पूजा-अर्चना होती ही रहती है! मेरे बड़े मामा जी का बक्सर शहर में ही घर है और वे वहीँ सपरिवार निवास करते हैं! मेरी माँ वहां घूम आईं हैं! मुझे अभी यह सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है! लेकिन इस किताब में उस स्थान का वर्णन पढ़कर लोमहर्षक रोमांच हो रहा है ...! अमीश की "SHIVA TRILOGY" में पौराणिक भारतीय उपमहाद्वीप का जो नक्शा छपा गया है वह भी गहन अध्ययन योग्य है; जिसमे 'अयोध्या', 'काशी', और 'मगध' सरयु और गंगा नदी के संगम पर निकट ही एक त्रिकोण में पास-पास ही हैं ...!!

स्वीकारोक्ति : उपन्यास के उपरोक्त प्रसंग में पूजा स्थल का नाम अमीश द्वारा "बक्सर" प्रयुक्त नहीं किया गया है! लेकिन 'ताड़का' वध वहीं हुआ था ये तय है, मैंने बक्सर का लिंक दिया है, यह साश्वत सत्य है।





मैं आगे की रोमांचक यात्रा पर 'शिव' के साथ निकलता हूँ तबतक आप कृपया नक्शा बाँचिये ...
नमस्कार
_श्री .