Friday, February 8, 2013

गाड़ी बुला रही है ..ओह! बचपन!!

गाड़ी बुला रही है - Gaadi Bula Rahi Hai (DOST -1974)

 

(Kishore Kumar)

Movie/Album : दोस्त (1974)
Music By : लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
Lyrics By : आनंद बक्षी
Performed By : किशोर कुमार
On Screen : धर्मेन्द्र    
                                                ...ओह! बचपन!!
                                                           धरम-पा जी

गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है......
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है......
चलना ही ज़िंदगी ..ई है
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है ....
सीटी बजा रही है...

देखो वो रेल ...
बच्चों का खेल ...
सीखो सबक जवानों......ओ ..ओ ..ओ
देखो वो रेल ...
बच्चों का खेल ... 
सीखो सबक जवा-आ-आ-नों ...
सर पे है बोझ ...
सीने में आग ...
लब पे धुंआ है जानो ...
फिर भी ये गा रही है ...
नगमें सुना रही है ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...

आगे तूफ़ान ...
पीछे बरसात ... 
ऊपर गगन पे बिजली ...ई ई ...
आगे तूफ़ान ...
पीछे बरसात ...
ऊपर गगन पे बिजली ई ...
सोचे न बात ... 
दिन हो के रात ...
सिगनल हुआ के निकली --<<<इस लाइन को मैं और शशि(My Brother) मिलकर गाते थे _ "सेग्नल होंके के नेक्ली ..इई ..." >>> --उस वक़्त ट्रेन की ज़र्नी हमारे लिए सुहाने सपने हुआ करती थी। फिल्म में इस लाइन के विजुवल में ट्रेन को गुजरने की इजाज़त देती "सिगनल" जब अपनी "बाँह" गिराती थी तो हमें रोमांच हो आता था। बाबूजी के साथ ट्रेवल करते समय सड़क पर कोई रेलवे का बंद फाटक मिलता था तो बाबूजी देर होने से जहां खीजते थे, हम दोनों भाई ट्रेन और सिगनल का 'वो' ही सीन, 'वो' ही तालमेल देखने के लिए प्रत्याशा से, ख़ुशी के मारे खिल उठते थे ..., ट्रेन को आँखों के सामने से '_लाइव_!' "यूँ " गुजरते देख हम सुर में सुर मिलाकर गाने लगते थे ..., --
देखो वो आ रही है ...
देखो वो जा रही है ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...

आते हैं लोग ...
जाते हैं लोग ...
पानी के जैसे रेले ...
आते हैं लोग ...
जाते हैं लोग ...
पानी के जैसे रेले ...
जाने के बाद ... 
आते हैं याद ...
गुज़रे हुए वो मेले,
यादें मिटा रही हैं ...
यादें बना रही हैं ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है ..ए ए ...
सीटी बजा रही है...

गाड़ी को देख ...
कैसी है नेक ... 
अच्छा बुरा न देखे ...ए ए ...
गाड़ी को देख ...
कैसी है नेक ... 
अच्छा बुरा न देखे ... 
सब हैं सवार ...
दुश्मन के यार ...
सबको चली ये ले के ...
जीना सिखा रही है ...
मरना सिखा रही है ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है...

सुन ये पैगाम ...
ये है संग्राम ...
जीवन नहीं है सपना ...
दरिया को फ़ांद ...
पवर्त को चीर ...
रस्ता बना ले अपना ...
नींदें उड़ा रही है ...
जागो जगा रही है ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है.............

'साहब! इस गीत को गाने के बाद भी क्या आप अपनी हिम्मत भरी जीवन को थकने देंगे ...?'
'बेटा! फिल्म और ज़िन्दगी में शायद यही फर्क है!, पेट भरा हुआ हो न तो ऐसे बोल फूटते ही हैं!' --<<:इस जैसा डायलोग बोलके खुदको निराश मत कीजियेगा।' -गुजारिश है। निवेदन है। प्रार्थना है ...गाइये .....
गाड़ी का नाम ...
ना कर बदनाम ...
पटरी पे रख के सर को ...
हिम्मत न हार ...
कर इंतज़ार ...
आ लौट जाएं घर को ...
ये रात जा रही है ...
वो सुबह आ रही है ..
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है...
गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है,
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है.............
http://www.youtube.com/watch?v=4A9nWHXXy00
http://www.youtube.com/watch?v=x7eGDwXjUeU
[खेद है यह फिल्म "दोस्त-1974" सिनेमा में तो अब क्या लगेगा, किसी DVD स्टोर में उबलब्ध नहीं ...न online, न किसी लोकल स्टोर में ..]
मोबाइल बज रहा है ...
"हलो!"
"हाँ, पापा?"
"हाँ! बेटा!"
" पापा ..ओ`, पैसा जमा करवा दिए हैं?"
"ठक!ठक!ठक!"
"हाँ! के555?"
"तेवारे जे ...?"
"हाँ?"
"बाबू बोलआ रहे हैं।"
"चलअ, आवइत हियऊ!"
"ए जीइई555!"
"हं...?"
" ई कपड्वा सब घरे हीं धोआयेगा कि धोबी घरे जाएगा? ...बोलते काहे नईं हैं? ...ओहो..ह:, ई त जब देखिये तब्ब कंप्यूटरवे पर बईठ के दिनभर का जानि का कुटत रहते हैं!..."
"ए बबुआ, सिरीकांत?"
"हं, माँ?"
"तनी ई देख त, ई दवइया दिन-भ में एक बे खाए के बा कि दू बे?"
"ए, तेवारी जे?"
"अर्रे हाँ, ईयार चलइत हियऊ!"
"पपा555!"
"देत्तेरत्त!! का है?"
"दो सौ दीजिये।"
"कहे ला?"
"सैम्पल पेपर खरीदना है।"
"तेवारे जे, इ कोई अइले हवआ।"
"के हई? ..हं, का भाई, का बात है?"
"भईया, उसका भाई डेथ कर गया!'
"..........................................."
"..........................................."
"..........................................."

अब गा के दिखाओ..........

जीना सिखा रही है ...
मरना सिखा रही है ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है...









_श्री .