Wednesday, January 16, 2013

हीईईयाआह !!! सु-स्वागतम! जी आया नूं ! पैरी पौना जी! जी सर!पाठक सरजी ! पधारो जी! सादर प्रणाम!
हह:!हह:! हह:!
अब मुझे लगता है कि थोडा रूक जाना चाहिए! रूककर थोड़ा आत्मविश्लेषण जरूरी है।



'चल भई ! सीक्रेट एजेंटाँ !! तेरी रोटी-शोटी करिए।'
'.............!!!'
_श्री .

हर कोई इसे पढ़े।

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जब भारत में 'डर्टी पिक्चर' को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलेगा तो बलात्कारियों का तो हौसला और बढ़ेगा..............

सनी लिओन जैसी विश्व वेश्या को भारत में जब अतिथि बनाकर लाया जाएगा तो माँ बहिन बेटियों का सामूहिक बलात्कार ही होगा। समस्या बलात्कार की बस एक तरीके से खत्म होगी अश्लीलता बंद और मौत की सजा।

देश की समस्या है पश्चिमी अंधानुकरण ::
पश्चिमी सभ्यता का परित्याग ही भारत को बचा सकता है। जो लोग टीवी और फिल्मों मे नग्नता फैलाते है वे फिर सेक्यूरिटी लेकर क्यूँ घूमते हैं ? इन लोगों की नग्नता फैलाने की सजा बेचारी हमारी आम माँ बहन बेटियो को भुगतनी पड़ती है। परेशानी है तो गाँव से शहर और शहर से घर से बाहर जाने वाली आम माँ बहन बेटियों को.....बलात्कारी उन माँ बहिनो मे ही सनी लिओन ढूंढते रहते है और मौका पाते ही बलात्कार कर देते हैं।

अब सनी लिओन और बॉलीवुड की बालाएँ तो हाइ सिक्यूरिटी ज़ोन में रहती हैं सड़कों पर तो हमारी माँ बहनें जाती है ............. इस अश्लीलता का सम्पूर्ण त्याग ही भारत मे सदाचार की गंगा बहाएगा।



मेरा उत्तर :
http://www.facebook.com/krantikaribharat/posts/527080797325918?comment_id=5960113&notif_t=feed_comment

आज गालो मुस्कुरा लो

'आज गालो मुस्कुरा लो महफ़िलें सज़ा लो, क्या जाने कल कोई साथी छूट जाए, जीवन की डोर बड़ी कमज़ोर! ...यारों !!'

मेरे बच्चों अगर आप इन पंक्तियों को पढ़ रहे हो तो तुम्हें भी उसी अहसास का अनुभव होगा जो मैं अभी अनुभव कर रोमांचित हो रहा हूँ। दोस्ती बड़ी अनमोल होती है, बचपन की निश्छलता जिसे सींचती है, इसकी कदर करना। आज तुम लोगों की और तुम्हारे दोस्तों की हमें ज़रुरत है। हमें भी अपना दोस्त समझो।

बचपन को याद करो! उन साथियों और उनके साथ धूल-मिटटी में खेले लम्हों और उस वक़्त के दौर को याद कर के उसके अलौकिक सुखद पलों को महसूस करो।

दीदी से बचपन की कहानियां सुनना! बाबूजी की मौजूदगी का स्नेहिल सुख! बाबूजी की कहानियाँ! वो लोरी! वो उनका गोद में लेकर प्यार से पीठ थपथपाना...........! बाबूजी के साथ गाडी में बैठकर सपरिवार गाँव जाना! रास्ते में पड़ते खूबसूरत नज़ारे! रेलगाड़ी की पहली सवारी। घर में जब पहली बार रेडियो, पँखा और साइकल आया था...! पहली बार कूकर की सीटी पर हमारा गिरते-पड़ते भागना! निश्छल हँसी के वे प्यारे-प्यारे पल ! कितना रोमांच है इन यादों में !! ..है न?

बचपन से ही देश एक प्यारा सा घर लगता है। हर कोई अपना-सा लगता है। देशभक्ति गीतों और फिल्मों की वीरतापूर्ण सुनहरी याद का रोमांच! फिर अपना शहर! अपना मोहल्ला! मोहल्ले की हर गलियां! हर मैदान! हर खेत! हर दोस्त! और हमारे खेल, .....हर वक़्त हीरोइज्म के ज़ज्बे से भरे!! कोई धर्मेन्द्र बनता! कोई राजेश खन्ना तो कोई प्राण! कोई महाबली दारा सिंह ! कोई देव-आनंद ! कोई अमिताभ! तो कोई अजीत! तो कोई अमज़द खान! तो कभी काऊबॉय फ़िरोज़ खान!! कॉमेडियन की नक़ल! कोई सैनिक कोई सिपाही तो कोई इन्स्पेक्टर, कोई विलेन,( ...जानबूझ कर उसे बनाते थे जिसे पीटने का खूब मन करता था). रेडियो में बिनाका गीतमाला सुनने के लिए सिलोन को ट्यून करने की टेंशन! पसंदीदा गाने के जीत की ख़ुशी! ...'बिंदिया चमकेगी..........!!!'  उस वक़्त पूजा पंडालों में बजते फ़िल्मी गाने और डायलाग पर यह बहस करना कि कौन-सा  गाना या डायलाग ज्यादा हिट रहा।

रफ़ी साहब के गीत -' ये रेशमी जुल्फें ...!' महेंद्र कपूर साहब की ओजस्वी आवाज़ -'.....मेरे देश की धरती ...!' मुकेश साहब की मखमली आवाज़ -' दीवानों से ये मत पूछो, दीवानों पर क्या गुजरी है ...!' सुनील दत्त साहब का गाना और उनका शानदार परफॉरमेंस -' न मूंह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो।' 'राजकुमार साहब का गाना -'हे!नीले गगन के तले, धरती का प्यार फले!' शशि कपूर साब की -'हे!नि सुल्ताना रे, प्यार का मौसम आया!' जितेन्द्र जी की -'अरे हो!...गोरिया कहाँ तेरा देश रे!...', -आने से उसके आये बहार, जाने से उसके जाए बहार,.....बड़ी मस्तानी है,.....मेरी महबूबा!' राजेन्द्र कुमार जी की "गोरा और काला!"_और उसके गीत! वाह..वा!!" धरम-पा जी की "आदमी और इंसान" के गाने -'जागेगा इंसान ज़माना देखेगा ...!' ... -' दिल करता! ओ यारा-दिलदारा मेरा दिल करता।' 'प्रेम पुजारी में -'ताक़त वतन की हमसे है!' में देव साहब की जोशीली चाल और वीर जवानों की कदमताल !! वाह वा!! दिलीप साहब की -'मधुबन में राधिका नाचे रे !'[ _इस गाने को हमारे बचपन के साथी-पडोसी-बड़े भाई अलोक भईया आज भी रफ़ी साब की हू-ब-हू नक़ल कर सुनाते हैं।] दिलीप साब की -'ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का, मस्तानों का,...', -'रामचंद्र कह गए सिया से!' दिलीप साहब की मस्ती -'मेरे पैरों में घूँघरू पहना दे तो फिर मेरी चाल देख ले!' धरम पा जी की अनमोल एस्पियोनेज फिल्म-"आँखें", जो आज भी प्रासंगिक है। "शोले" की अमिट-अमर याद! "डॉन" का -'खई के पान!'...'अमिताभ बच्चन का शेट्टी का मुँह चिढाना -' अबे ओ गंजे ,....!!!' मन्ना-डे साब का अमर गीत, अमित जी की मासूम हंसी और प्राण साहब का डांस-'यारी है ईमान मेरा यार मेरी ज़िन्दगी!' मन्ना-डे साब का -'ओ मेरी ज़ोहराज़बीं!' बलराज सहानी जी को .._जे मैं भूलूं ते दुर्र फिटे मूं !!


लुका-छिप्पी! गिल्ली-डंडे से लेकर क्रिकेट के मैच में जीत की हिप-हिप-हुर्रे! पतंग उड़ाना और कटीपतंग को लूटने में जांबाजी और मारामारी। कंचे (अंटा) का खेल! कब्बड्डी!बैडमिन्टन! लूडो! लट्टू! कैरम! तालाब में दोस्तों के संग अठखेलियाँ!! बगान से माली का खदेड़ना! स्कूल की घंटी। छुट्टी की चिल्ल-पाँव!! मास्टर साहब की छड़ी! उनका-(हमारा)- कान खींचना! हमारा मूँह बनाना! इतिहास-भूगोल, गणित और विज्ञान की किताबें! हिंदी पुस्तकों की कहानियां और दोहे! कभी परीक्षा की टेंशन! कभी रूठना-मनाना! सिनेमा की टिकट की जंग में शरीक होना! त्योहारों की धूम! होली-दीवाली-दशहरे के अनमोल क्षण! कॉमिक्स का मज़ा!!.........वा वा !!!

वह ज़िन्दगी जहाँ छल-कपट से भरी गन्दी इंसानी फितरत के लिए कोई जगह नहीं।

सबसे बढ़कर देशप्रेम का वो ज़ज्बा जिसकी रोमांचक मौजूदगी की वजह से आज भी हम सदा अंग-संग हैं।

भगवान् करें इसे किसी की बुरी नज़र न लगे।

_श्री .