Saturday, January 12, 2013

हनी सिंह की नहीं सुभद्रा कुमारी चौहान की आवश्यकता है

पकिस्तान की आलोचना के बीच अपने देश के भीतर नासूर की तरह पकते, फलते-फूलते नक्सलियों के द्वारा वीरगति को प्राप्त हमारे एक जांबाज प्रहरी के शव में जिंदा बम प्लांट करना क्या उस तालिबानी बर्बरता से कम है जिनके कारण मानवता शर्मसार होती है? इन विचलित कर देने वाली बर्बर घटनाओं के कारण 'दिवंगत "दामिनी" की चीख' कहीं दब नहीं गई? ..........ज़रा सोचिये ..., क्या कोई सियासत की चालबाजी है या सच में अब आदमी आदमखोर बन गया है? सरकार की क्षमता नक्सलियों के आगे अगर इतनी ही पंगु है, तो फिर सीमा की सुरक्षा की सोच कर क्या रूह नहीं काँप जाती? सरकार का यही रवैया रहा तो भगवान् न करे, हमें काफी दुःख-दंष झेलने पड़ेंगे .....! -यह एक आम आदमी की चीख है .........कोई सुन रहा भी है या नहीं?

आज देश को हनी सिंह की नहीं सुभद्रा कुमारी चौहान की आवश्यकता है। ........वंदे मातरम !!

_श्री .

Swami Vivekananda ‎(Today Swami Vivekananda's 150th Birthday) 1863-2013

आज हमारे शहर लोहरदगा में अभूतपूर्व मनभावन दृश्य देखने को मिला। खुद को डॉक्टर से दिखाना था क्योंकि मुझे ठंढ लग जाने के कारण छाती में कफ जम जाने से जब खाँसी उठती है तो थमने का नाम नहीं लेती। कई रातों से ठीक से सो भी नहीं पाता, जोर से हंसने या साँस लेने पर खूब जोर से खाँसी होने लगती है, हाल बे-हाल हो जाता है।
मोटरबाइक से डॉक्टर के यहाँ जाने को निकला तो घर के निकट थाना टोली मस्जिद मोड़ के पास भारी जाम लगा मिला। कुछ सोच कर मैंने शॉर्टकट रास्ता पकड़ा और एक गली से होते न्यू रोड जाना चाहा तो मेनका सिनेमा, देवी मंडप के पास गली के मुहाने पर भी भारी जाम मिला। यहाँ जाम का कारण पता चला। मौका था पूज्यनीय स्वामी विवेकनन्द जी के 150वीं जन्मोत्सव का। विभिन्न स्कूलों के बच्चों की सामूहिक जुलूस और झाँकी गुजर रही थी। अपने-अपने स्कूल-यूनिफार्म में सजे बच्चे-बच्चियाँ हाथों में तख्ती और बैनर लिए स्वामी जी के सम्मान में जयघोष करते जा रहे थे। जुलूस की लम्बाई और छात्र-छात्राओं की संख्या बेमिसाल थी। जुलूस इतनी लम्बी थी कि थाना टोली से लेकर न्यू रोड होते स्टेडियम तक पहुँच रही थी। जुलूस के सम्मान में हर सड़क हर मोड़ पर ट्रैफिक थम गया था। पर कहीं कोई जल्दीबाजी या बेचैनी नहीं बल्कि उत्सुकता, प्रसन्नता और गर्व से तमतमाते चेहरे रोमांच पैदा कर रहे थे। खूबसूरत झाँकी में कोई बालक विवेकानंद बना मुस्कान बिखेर रहा था।  कोई स्वामी जी द्वारा शिकागो में दिए लोकप्रिय भाषण के अनुवाद को पढ़कर सूना रहा था। वाह! मन झूम गया। झाँकी के पीछे चलते बच्चों की लम्बी लाइन संयमित और उत्साहित हो नारे लगा रहे थे। उनके शिक्षकगण जुलूस को भली-भाँती कंडक्ट कर रहे थे। इस समय मैंने अपने कैमरा को बहुत मिस किया। फिर मोबाइल की याद आई जिसमे छोटी MgP की सही पर कैमरा है। मैं भीड़ में थोडा-थोडा कर किसी तरह न्यू रोड पर पहुंचा। वहाँ का नज़ारा और भी मनभावन था। जुलूस को निकल जाने देने के लिए सड़क के हर तरफ हर प्रकार के दुपहिये-चौपहिये वाहनों की असंख्य कतार लगी हुई थी जिसे बड़ी मुस्तैदी से टैफिक पुलिस संभाले हुए जुलूस को बढ़ते जाने का निर्देश दे रही थी। मैंने फिर कोशिश की। और खिसकते-खिसकते न्यू रोड स्थित अपने बाबूजी द्वारा निर्मित हमारे मकान पर जा पहुंचा। मैंने तुरंत मोटरबाइक को मकान के ओटे पर चढ़ा कर खड़ा किया और सीढियां फलांगते सबसे ऊपर खुले छत पर जा कर देखा तो कई तरह के पेड़ों और दुसरे मकानों की ओट हो जाने के कारण दृश्य बाधित लगा। तभी सामने की छत पर से भईया "व्यास जी" की पत्नी "भउजी" ने मुझे देखा और अपने छत पर आने का इशारा किया। पर भीड़ के कारण यह हो न सका, और झाँकी करीब पहुँच चुकी थी। मैं एक मंजिल नीचे उतरा और सड़क के सामने वाले बरामदे पर पहुंचा। वहां काफी लोग जमा थे। वहां से मैंने जुलूस और झाँकी की कुछ तस्वीरें लीं, पर मुझे तसल्ली नहीं हुई। मैं नीचे उतर कर अपनी बाइक के पास खड़ा हो कर तस्वीरें लेने लगा। पर मोबाइल ने ठीक से परफोर्म नहीं किया। दुसरे जेब से दूसरा मोबाइल निकाला और उसी के कमज़ोर अधमरे कैमरे से जितना सुलभ हो सका तस्वीरें लीं। पर जो नज़ारा मैं अपनी आँखों से देख सका उसके लिए "खाँसी बाबा" की जय!!











जुलूस के निकल जाने और ट्रैफिक के सामान्य होने पर मैंने पाया कि अब डॉक्टर के यहाँ न जा सकूँगा। सो, खांसते हुए घर वापस .......  


_श्री .

हमारी एक ''पृथ्वी'' या "अग्नि" ही काफी है तुम्हारे सारे वजूद के लिए......आ ...!

जितनी मेरी उम्र है उसे मैंने पाकिस्तान की मुखालफत में ही देखा ! कभी किसी व्यक्ति विशेष की मुखालफत के रूप में। तो, कभी किसी राक्नीतिक दल की मुखालफत के रूप में ! तो कभी समूचे देश की मुखालफत के रूप में !!! क्या ये मेरी गलती है ? ..क्या किसी अतिमहत्वपूर्ण व्यक्तिविशेष की गलती है? क्या ये, ...फिर, किसी  राजनीतिक दलों की गलती है? या फिर देश की सोच-समझदारी की ही गलती है जो हर कोई पाकिस्तान की मुखालफत ही देखता है? इसके बाद बाकी के दुसरे अमेरिका, इंग्लैंड और बाकी के पूरे विश्व  के देश भी पगला गए हैं!? इतने लोग, इनके देश और इनकी जनता क्या पागल और हिंसक हैं!!!!? या .. रे ... रे ... रे पाकिस्तान तेरी ही गलती है?  ऐसा ही है, तो फिर भीड़ जा न! दुमुंहें साँप!! दोगली मानसिकता में दीवाने पकिस्तान! आ न !! खुलके आक्रमण की घोषणा कर ! कमीने , कायर ! स्साले !! हमारी एक ''पृथ्वी''  या "अग्नि" ही काफी है तुम्हारे सारे वजूद के लिए..................आ ...!

जय हिन्द !!!

चमरराम के फूल, और हमारे प्रिय,मंझले, इंजिनियर साहब

 आज के दिन सन 2013 में मेरे घर में पहली बार पूजा-अर्चना और शंखनाद हुआ। ईश्वर का लाख-लाख शुकर। आज ऑफिस में चमरराम ने मुझे, अपने निश्छल प्रेम के रूप में कुछ फूल दिए। ये मेरे परिवार के लिए है,जो आपलोग हैं। सन्नी ने इस पल को संजोने का काम किया। फिर सन्नी ने खुद, मेरे संकलनों में से, "अमर चित्र कथा" छाँटकर निकाला और जाड़े की स्निग्ध धूप में बैठ उसका रसास्वादन करने लगे। देखिये मेरे चमरभाई को, उनके उगाये फूलों को, और सन्नी [हमारे प्रिय,मंझले, इंजिनियर साहब] को "अमर चित्र कथा" पढ़ते हुए.........मलुवा नीचे बैठी है, उसके बच्चे दूध पीने की होड़ में ..........!











_श्रीकांत .