Wednesday, November 21, 2012

कसाब को फांसी दे दी गई!

कसाब को फांसी दे दी गई!


आज सुबह सबेरे 07:30 बजे मुंबई 26/11 के हमले को अंजाम देने वाले आतंकी आमिर अजमल कसाब को यरवडा (महाराष्ट्र) जेल में फांसी दे दी गई! यह समाचार 26/11 के हमले में शहीद हुए वीरों के परिवार के साथ-साथ पूरे देश के लिए राहत और चैन की बात है। लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के अंजाम दी गई यह घटना कई सवाल खड़े करती है।

जहाँ सत्ताधारी यु.पी ए. की सरकार स्वयं अपनी पीठ थपथपायेगी, वहीँ विपक्ष इसे भी राजनीति की एक चाल बता कर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी। आज बी.जे.पी. की हल्लाबोल रैली है, दूसरी राजनैतिक पार्टीयाँ और बी.जे.पी.कभी भी किसी भी हालत में यु.पी ए. की सरकार के इस कदम को मुक्त कंठ से नहीं सराहेगी, उसका आरोप होगा कि घोटालों से घिरी सरकार ने कसाब को (जल्दबाजी में) फांसी दे कर झूठी प्रसन्नता बटोरने की कोशिश की है। कोयला घोटाला, FDI, गैस ... blah blah blah  से संकट में पड़ी यु.पी ए. की सरकार ने कसाब को आनन-फानन में फांसी दे कर अपनी छवि सुधारने की कोशिश की है।

इसके बावजूद यह हमारे लिए खुशखबरी है और पाकिस्तान जनित आतंक को देश का जबाब है।

जय हिन्द!

श्रीकांत तिवारी 
21,नवम्बर`2012
लोहरदगा

Tuesday, November 20, 2012

क्या भूलूँ - क्या याद करूँ? 20 नवम्बर 2012

लोहरदगा, थाना टोली          20 नवम्बर 2012          09:57 प्रात:

17 नवम्बर से ले कर अभी तक बहुत कुछ हुआ है।

क्या भूलूँ - क्या याद करूँ?

बाल ठाकरे की अभूतपूर्व ऐतिहासिक अंतिम विदाई !? या ...
अमिताभ बच्चन का उदास गंभीर और सोच में डूबा चेहरा !? या ...
उद्धव ठाकरे का बिलख-बिलख कर रोना !? या ...
राज ठाकरे के घडियाली आंसू !? या ...
क्षणभंगुर छठ पूजा !? या ...
पटना के छठ घाट पर घटी दुखद दुर्घटना !? 
प्राण साहेब (92) के अटके प्राण ?

... हे भगवान् इनकी, हमारी, सबकी रक्षा करो
...
2012
2012
2012

इस मनहूस वर्ष को और कितनी जान चाहिए ?
2012 को और कितनी नर-बलि चाहिए ?
...

?

क्या इन्हें भूल कर "हुले-ले-ले" करने को ही जीवन कहते हैं ? 
You win some, you loos some, life goes on...
the clock is ticking...

- श्रीकांत तिवारी 


Saturday, November 17, 2012

बाल ठाकरे नहीं रहे !!!

बाल ठाकरे 



 
बालासाहेब केशव ठाकरे
...................................आज इस व्यक्तित्व का निधन हो गया। व्यक्तिगत रूप से मैं कभी भी इनसे और इनकी नीतियों और सिद्धांतों से पूर्णतया सहमत नहीं रहा, लेकिन इस महान योद्धा के नहीं रहने पर काफी दुःख और बेचैनी महसूस कर रहा हूँ।

ईश्वर इनकी आत्मा को शांति एवं सदगति प्रदान करें।

-श्रीकांत तिवारी 
17 नवम्बर`2012
लोहरदगा, झारखण्ड 

Wednesday, November 7, 2012

सारे कुत्ते तीर्थ करने चले जायेंगे तो पत्तल कौन चाटेगा ?

ख़ास-विशेष मौकों पर अमीरों की फितरत है कि ये अपने स्टाफ को, चाहे वो किसी भी ओहदे का हो, बड़ी ही शिद्द्त (यतन) के साथ हमेशा ये याद दिलाते रहना, ये एहसास करते रहना कि "- तुम महसूस करो कि तुम निकृष्ट, निम्न, छोटे, और नौकरों की जामात के प्राणी हो, अपनी औकात में रहो-"...काफी अखरता है।

 दुःख तब और बढ जाता है जब उस गरीब की मामूली औकात उसके मुंह पे मारी जाती है।

 अमीरों के ऐसे रवैये से लगता है कि वो कह रहे हैं कि : "-सारे कुत्ते तीर्थ करने चले जायेंगे तो पत्तल कौन चाटेगा!? -यही न!?

- श्रीकांत