Monday, October 18, 2010

"_नाना भाँति राम अवतारा, रामायण सतकोटि अपारा_"

रावण ने जलने से इनकार कर दिया, बोला पानी बरस रहा है ! फिर भी "फ़ौज" ने उसे फूंक डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी. पानी के बाण आसमान से बरस रहे थे, जिससे बचने के लिए फ़ौज और जनता तितर-बितर हो कर पनाह ढूंढ रही थी. अध्-जले रावण ने अगले साल के लिए ललकार लगाई जिसे "फ़ौज" और जनता ने आतिशबाजी से जबाब दे कर स्वीकार किया. हो गया दशहरा !!
"_नाना भाँति राम अवतारा, रामायण सतकोटि अपारा_"