Saturday, October 2, 2010

Amitabh Bachchan aur Main # 26 se Aage...

#27
लोहरदगा      थाना टोली / थाना रोड     ०२/अक्टूबर/२०१०        शनि०४:२२सायं 

अमिताभ बच्चन !! एक ऐसा नाम जो {१९७३ से २०१०}=३७ वर्षों से मेरे दिलो-दिमाग पर छाया हुआ है, मैं कभी इस नाम और इस नामधारी व्यक्तित्व के प्रभाव से अछूता नहीं रहा, ...बल्कि ऐसा करने की मैंने कोशिश ही नहीं की, ...क्या जरुरत थी !? ...हर आदमी किसी-न-किसी में अपने-आप को ढूंढ़ने की कोशिश करता ही है, ...मैंने अमिताभ बच्चन में खुद को पाने की कोशिश की तो क्या गलत किया? ऐसा कर के मैंने कुच्छ भी गलत नहीं किया, ...हाँ ! इस बात पर कोई बहस कर सकता है की अपनी इस कोशिश में मैं कामयाब रह पाया या नहीं..., लेकिन यहाँ ये बात इस आख्यान का मुद्दा नहीं !! यहाँ ये बात मुद्दा है कि अमिताभ बच्चन मेरे दिलो-दिमाग पर आगे भी छाये हुए रहेंगे या नहीं ? ...और ये अमिताभ बच्चन की नहीं, मेरी समस्या है ! कोई किसी वस्तु से ईतना प्यार करता है कि उसके खो जाने के डर से उसे खुद ही नष्ट कर देता है!, ...कोई भक्त अपने भगवान् से ईतनी भक्ति करता है कि उससे नाराज़ होने का हक रखता है!, ...उस-से रूठने का हक रखता है!, ..उसे डांटने का हक रखता है!, ...उस सर्व-शक्तिमान ईश्वर से तू-तड़ाक की भाषा में उससे बातें करता है!,  और कभी गुस्से में आ कर उसी भगवान् की मूरत को तोड़ भी देता है !!! ...फिर बाद में सर पटक-पटक कर रोता है क़ि ये मैंने क्या कर दिया !?!? ...इसलिए मेरा मानना है की अमिताभ बच्चन जैसी शख्शियत को उन्हें उनकी जगह :'सिनेमा-स्क्रीन': पर ही रहने देना चाहिए और मुझे मेरे अपने एक आम-आदमी :'एक-दर्शक': की जगह पर ही रहना चाहिए, न की एक दुसरे से ऐसे रिश्ते और सम्बन्ध की कल्पना करनी चाहिय जिसका पूरा होना असंभव है, जिससे बाद में मुझे ही दुःख हो. _अमिताभ बच्चन को इस-से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं ! ३७ साल एक युग के बराबर है जिसमे इंसान की कितनी ही पीढ़ियाँ गुजर गयीं, गंगा जी से होते कितना पानी बह गया इसका कोई हिसाब नहीं, ...कितने लोग अपने दिल में अमिताभ बच्चन से -रु-ब-रु साक्षात्- मिलने की कामना लिए बॉम्बे-टू-मुंबई गए और कहाँ खो गए पता नहीं, ...अभी भी रोज़ अमिताभ बच्चन के घर के बाहर उनके चाहने वालों की अनगिनत भीड़ लगी ही रहती हैं, ...कोई उन्हें छूना चाहता है, कोई बात करना तो कोई 'औटोग्राफ' लेना चाहता है, पर कितने लोग कामयाब हो पाते हैं !?? क्या श्रीरामजी की तरह अमिताभ अपने हरेक चाहने वालों से एक बार में ही एक ही वक़्त मिल सकते है ?? कदापि नहीं. इसलिए अच्छा है की हम खुद को समझाएं !! अमिताभ बच्चन से मिलना आसान बात नहीं है _ ये एक सच्चाई है जिसे हमें स्वीकारना ही होगा. जब से "_कौन बनेगा करोडपति_"की शुरुआत हुई है, बहुत से लोग अमिताभ बच्चन से मिलने की कामना से ही प्रतिभागी बनते हैं, ...मैं ये भी नहीं करना चाहता. अब एक नई सुरसुराहट हुई है -अमिताभ बच्चन के ब्लॉग पर कमेन्ट लिखने का !!! कितने लोग ख़ास उस बात पर कमेन्ट लिखते हैं जिसकी चर्चा अमित जी ने अपने ब्लॉग पर की होती है_??? शायद नाम मात्र के लोग जो English Language की अच्छी जानकारी रखते हैं, जिन्हें English नहीं आती वह कामचलाऊ ही कुछ लिख कर स्वयं खुश हो लेते हैं. अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग पर लिखने के लिए English Language को ही क्यों तरजीह दी ?? ...शायद इस लिए की यूँ बेकार की भीड़ से वो बचे रहें और पढ़े-लिखे अच्छे विचारों वाले लोगों के ही विचार उन तक पहुंचें !! ...लेकिन अमिताभ बच्चन की फिल्म देखने के लिए ऐसी पाबन्दी नहीं है, एक फकीर भी जो ticket की कीमत भर सकता हो वो उनकी फिल्म देख सकता है, ऐसे ही लोगो की संख्या सबसे ज्यादा है और वो ही हम हैं जो अमिताभ बच्चन के सच्चे प्रसंशक हैं, ...जिन्हें अपनी औकात पता है,  ..."_लावारिस_" की तरह जो अपना कफ़न साथ लिए फिरते हैं और जो जानते हैं की नफरत और हिकारत भरी नज़रों का क्या मतलब होता है, जिसे हम रोज़ झेलते हैं, ...ऐसी नज़र से साहब भी देखता है और साहब का दरवान भी !! ऐसी हिकारत भरी नज़रों के तले हम रोज़ लाखों बार मर-मर कर जीते हैं, ...रोज़ ३००-३५० लोग ऐसा प्रयास अवश्य करते हैं क़ि अमित जी के ब्लॉग पर उनका कमेन्ट flash हो जाये जिसे वो फ़ोन कर के अपने दोस्तों को बताएं क़ि "..अरे देखा! आज का मेरा कमेन्ट जो मैंने अमिताभ को लिखा है!!", ...इस प्रत्याशा से कम क़ि शायद इस पर अमित जी की नज़र पड़ जाये ...और उनका *"_निमंत्रण_"* आ जाय, इस प्रत्याशा से ज्यादा क़ि जानने वालों में उनकी धाक बनी रहेगी !! ये भी मेरे जैसे आम-आदमी के लिए एक दिवा-स्वप्न, एक कपोल-कल्पना, एक मृगतृष्णा-सी ही है, जो इतना भी सोच सकें !!
फिर भी ....... 
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    ...एक अजनबी फिल्म के टीवी-प्रोमोज के देखने दरम्यान मुझे ऐसा लगता था की ये फिल्म भी बस 'यूँ ही _ऐसी-वैसी ' ही होगी, लेकिन फिल्म देखने के बाद यह इस दशक की इकलौती फिल्म है जिससे मैं  दाढ़ी वाले अमिताभ बच्चन का कायल हो गया, और ये फिल्म भी मेरे पसंदीदा फिल्मो की लिस्ट में शुमार हो गई.
२००५ तक अमित जी की लोकप्रियता इस हद तक पहुँच गयी थी की अब उनकी थोड़ी देर की कैसी भी उपस्थिति किसी भी फिल्म को सुपर हिट का दर्ज़ा भले न दिला सकी हो पर अमित जी की उपस्थिति को दर्शकों ने अवश्य underline /mark /रेखांकित/ notice किया और सराहा. अब तक अमिताभ बच्चन एक जीवित किवदंती (...जिसका सत्य या असत्य होना प्रासंगिक नहीं.)=[ A LIVING LEGEND ] बन चुके थे, और अपने फ़िल्मी-करियर के उस मुकाम पर पंहुंच चुके थे जहाँ अब उनको कुछ खोने का डर नहीं था, अत: अमित जी अब किसी भी प्रकार के प्रयोग के लिए किसी भी अच्छी फिल्म में अपना योगदान दे सकते थे, ...लेकिन दर्शक वर्ग भी अपनी ख़ास-पसंद का हक रखता है !! इसलिए अच्छे-बुरे की तमीज कुछ नामचीन फिल्म निर्माता-निर्देशकों को अवश्य होनी चाहिए जब वो ख़ास अमित जी के साथ ख़ास हम दर्शकों के ही फ़िल्में बनाते हैं जो उनसे अपनी उम्मीदें लगा कर रखते हैं !! ...लेकिन ऐसा नहीं हुआ और २००५ में "_सरकार_"और "_विरुद्ध_" के बाद... एक बार फिर से अमित जी की फ्लॉप फिल्मों की श्रृंखला शुरू हो गयी जिसमे सिर्फ दर्शक ही लुटता है !!!
...२००६-२००७ में अमित जी ऐसी कोई फिल्म काफी दिनों तक नहीं आई जो ख़ास मुझे आकर्षित करने वाली कोई घंटी बजा सकी हो. आगे अमित जी की फ़िल्में जिन्हें मैंने नहीं देखा -- '-रामजी लन्दनवाले-' में मेहमान थे, फिर इसीप्रकार '-अमृत्धारे-', "__फॅमिली__" का प्रचार बढ़िया से नहीं किया गया था, फिल्म मैंने देखी नहीं अत: कुछ कहना मुहाल है. आगे--जिन्हें मैंने नहीं देखा-- '-डरना जरुरी है-', '-कभी अलविदा न कहना-'. '-बाबुल'-, '-एकलव्य__the Royal Guard-', '-निशब्द-', '-चीनी कम-', .-Shootout at -लोखंडवाला-', '-झूम बराबर झूम-',  फिर वो फिल्म आई जिसके सम्बन्ध में कुछ कहना "_न_" ही बेहतर होगा क्योंकि ऊपर मैंने अपनी भावना व्यक्त कर दी है इस फिल्म का नाम ही  खुद अपना बुरा हश्र बयां करता है --"_रामगोपाल वर्मा की आग_" !! फिर '-ओम-शांति-ओम-', में मेहमान. २००७ में "_भूतनाथ_" को हमने-बच्चों ने कई बार देखा, फिल्म अच्छी लगने पर ऐसा भी किया जाता है न !! "-सरकार राज-" से कोई विशेष घंटी नहीं बजी. "_The Last Lear _" अंग्रेजी भाषा में बनी अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म हैं जो अच्छे-खासे चर्चा का विषय बनी, फिल्म ने वहां घंटी बजाई जहाँ से अवार्ड दिए जाते हैं, अत: अमिताभ बच्चन को इस फिल्म के लिए Stardust Best Actor का अवार्ड मिला. मुझे अंग्रेजी नहीं आती इसलिए मैंने ये फिल्म नहीं देखी. फिर '-गोंड तुस्सी ग्रेट हो...[जिसमे "_मोर्गन फ्रीमन और जिम-कैर्री _" को चिढाने की नाकाम कोशिश की गई_!], '-दिल्ली-6 -[...ससुराल गेंदा फूल]',  और अलादीन-'............से होते
यह फिल्म बच्चन परिवार के लिए खासी भावनात्मक अहमियत रखती है, अमित जी ने साबित कर दिखाया है की अच्छे कथानक के अनुसार निर्देशन भी अच्छा हो तो उनकी उम्र का उनसे बड़ा 'सक्रीय' कलाकार अभी कोई नहीं जो उन्हें उनकी super-stardum के सिंहासन से डिगा सके, जिसके लिए अमित जी को filmfare best Actor Award का सम्मान मिला, [मैं तो हमेशा अपने दिल में अमित जी के लिए best of 'the bests' actor का award  स्थापित कर के हाथ में लिए ही रहता हूँ, पता नहीं कब देने का मौका आ जाय, ...रह-रह कर अमित भैया लेते ही जो रहते हैं !!], ...और इसी फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन को को नेशनल बेस्ट फिल्म एक्टर अवार्ड की घोषणा हो चुकी है, अब तो इस फिल्म पर काम किये अमित जी का एक पूरा साल गुजर चुका है,  
... और मेरे अमित भैया के कदम
 POWER … the other look that went wrong yesterday .. a pilot in uniform … looking neat I think
Amitabh Bachchan.
  "_पॉवर_"  
की तरफ बढ़ चले हैं...
...शायद २०११ में... 
फिलहाल तो हमें इंतज़ार है आगामी ११-अक्टूबर का जिस दिन अमित जी फिर से टीवी पर '-कौन बनेगा करोडपति-' की नई श्रृंखला शुरू करेंगे और जिस दिन उनका जन्म-दिन भी है ! 
...जारी... 
Lohardaga     03/october/2010     Sunday 10:07PM 
103 & 110