Thursday, September 30, 2010

Prasangvash : *_ AYODHYA _* http://bigb.bigadda.com/?p=6701

                     अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग के आज के पृष्ठ पर जिस विषय की चर्चा की है वो समय के अनुसार और उनके जैसे व्यक्तित्व से अपेक्षित भी था. अयोध्या ! भगवान् श्रीरामचंद्र जी की जन्म भूमि ! ...उन बच्चों के लिए कौतुहल का विषय बना हुआ है जो कि इसके इतिहास से अनभिज्ञ हैं, ...अभी जिस कक्षा में वो हैं -उनकी किताबों में भी अभी इन नौनिहालों को इतना नहीं बताया गया है कि ये इसकी महत्ता या आज के हालात कि संवेदनशीलता को समझ सकें ! ...सिर्फ राम कथा, हनुमान कथा, या रामायण नाम से छपी एक कहानी मात्र है, जिसमे इनकी दिलचस्पी सिर्फ इतनी है, और इनके मम्मी-पापा भी इतना ही चाहते कि _वे अपने EXAMS में सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर लिख सकें, ...फिर क्यों गैर-जरुरी बातें उन्हें बताई जाय !! इतिहास कि महत्ता और स्थान विशेष के धार्मिक-आध्यात्मिक महत्व से अनभिज्ञ इन् मासूमों को ये समझने में अभी वक़्त लगेगा, लेकिन कुछ बातें बच्चे भी अपने बाल-सुलभ निश्छल स्वाभाव से सहज ही समझ जाते हैं, अपने आस-पास कि दुनिया और घरों के दीवारों से भी सीखते हैं कि कहाँ किसकी तस्वीर है और वो क्यों पूज्यनीय है और इसी समय इन्हें ये भी समझ में आ जाता है कि किसे अस्पृश्य समझना है !! ...लेकिन इधर कुछ दिनों में ऐसा क्या हो गया है कि लोग एकाएक आशंका के साथ इसकी चर्चा कर रहे हैं, ...गली-मोहल्ले अपनी प्रति-दिन कि स्वाभाविकता त्याग कर किस कट्टरपंथ कि आलोचना-विवेचना में लग गए ! ...जैसे कुछ अशोभनीय और नुकसानदायक होने वाला है, ...आज स्कूल बस क्यों नहीं आया !? ...आज शहर में सन्नाटा क्यों है !? ...किस संकट और आतंक की बात हो रही है ? ...!! "...आशंका भरी चर्चा, अफवाह, सतर्कता, सुरक्षा...???  क्या... !!!" _क्यों!? ...जिसके सीधे असर में तस्वीर बनाने वाला, तहरीर लिखने वाला नहीं बल्कि ये बच्चे ही आने वाले हैं, _इन्हीं के लिए इनके सवाल का जबाब -["_फैसला_"]- सही-सही देना है,  दे ही देना है बस.....!
...अब तो ख़ास अयोध्या वाले भी नहीं चाहते की उनके शहर को फिर अवांछित भीड़ से भरी जाय_ 
अमिताभ बच्चन द्वारा उल्लेख कि गई उपरोक्त पंक्तियाँ जिन्हें १९३५ में श्री हरिवंश राय बच्चन जी ने लिखा था :
"मुसलमान और हिन्दू हैं दो _एक मगर उनका प्याला,
एक मगर उनका मदिरालय _एक मगर उनकी हाला, 
दोनों रहते साथ न जबतक _मंदिर-मस्जिद में जाते,
बैर बढ़ाते मंदिर-मस्जिद _मेल कराती मधुशाला."
                    _ये पंक्तियाँ हमने स्कूल में अपनी हिंदी की किताब में पढ़ा था, समयांतराल से फिर किसी कक्षा में ये भी पढने को मिला था, जिसे स्व. हरिवंश राय बच्चन ने ही लिखा था जो आज भी प्रासंगिक है : 
...जो बीत गयी सो बात गई":

जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
अंबर के आंगन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गये फिर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अंबर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई
 

जीवन में वह था एक कुसुम
थे उस पर नित्य निछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया
मधुबन की छाती को देखो
सूखी कितनी इसकी कलियाँ
मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ
जो मुरझाईं फिर कहाँ खिली
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुबन शोर मचाता है
जो बीत गई सो बात गई 

जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वह टूट गया तो टूट गया
मदिरालय का आंगन देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं कब उठते हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है
जो बीत गई सो बात गई 

मृदु मिट्टी के बने हुए हैं
मधु घट फूटा ही करते हैं
लघु जीवन ले कर आए हैं
प्याले टूटा ही करते हैं
फिर भी मदिरालय के अन्दर
मधु के घट हैं मधु प्याले हैं
जो मादकता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं 
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालों पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है
 

जो बीत गई सो बात गई ...............हरिवंश राय बच्चन
अमित भैया को तो ये सब जुबानी याद होगा ही...
******************************

...फैसला आ चूका है, सम्बंधित लोगों की स्वाभाविक प्रतिक्रियाएं भी आ चुकीं हैं, और अभी आती होंगी, आगे भी आती रहेंगी.
...अब तो स्कूल-बस चालू कर दो भाई !!

-श्रीकांत
http://shrikanttiwari.blogspot.com/

Wednesday, September 29, 2010

Amitabh Bachchan aur Main # 25 se Aage...

#26
श्री अमित भैया !
सदर प्रणाम.
हे असम्बोधानीय !!
...मुझे क्षमा करेंगे, मैं आज पहले ही चालू हो गया !
लोहरदगा        थाना टोली/रोड              २९/सितम्बर/२०१०        ०८:३४ सायं
२००५ क़ि अमित जी जो फिल्म रिलीज़ हुई वो भी एक प्रायोगिक फिल्म थी लेकिन इसका प्रचार कुछ ऐसा हुआ था क़ि देखने क़ि उत्सुकता बढ़ गई थी, फिल्म के रिलीज़ होते ही मैं न देख सका, ...जब देखा तो डर गया ! अमित जी ने अभिनय ही ऐसा किया है !! उस फिल्म को एक बार देखने के बाद आज का दिन है कई अवसर आये लेकिन दुबारा देखने का सहस न जुटा सका !! अमित जी ने अभिनय ही ऐसा किया है !! घर पर सी. डी. है पर देखने क़ि हिम्मत नहीं होती ! अमित जी ने अभिनय ही ऐसा किया है !! घोषणा हुई क़ि इस फिल्म के लिए अमित जी को सरकारी ईनाम मिलेगा, लेकिन फिर भी मुझे इसे फिर से देखने का मन नहीं हुआ ! अमित जी ने अभिनय ऐसा किया है !! वह घोषित पुरस्कार अमिताभ बच्चन को दिए गए ! Double-Winner, Filmfare Best Actor Award & Filmfare Critics Award for Best Performance.; Winner, National Film Award for Best actor वह फिल्म थी संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित फिल्म
 
*"_ब्लैक_"*
फिर भी मैंने इस फिल्म को अभी भी दुबारा नहीं देखने का सहस होता , अमित जी ने अभिनय ही ऐसा किया है !! बच्चा तो डरेगा ही न !!!
अगली रिलीज़ थी "_वक़्त_The RaceAgainst Time" ! जिसमे बोमन ईरानी जैसे बेहतरीन कलाकार अमित जी के साथ थे ! फिर बरी आई बहु प्रतीक्षित फिल्म 
 *"_बंटी-और-बबली_"* क़ी ! 
मैं यहाँ इस फिल्म क़ी सिर्फ दो बातों क़ी चर्चा करूँगा : पहली बात :- फिल्म में अमिताभ बच्चन अपने सिनिअर के कहने पर दूसरी ड्यूटी मंजूर तो कर लेते हैं लेकिन ऑफिस से विदा होने से पहले अपने ऑफिसर को कहते जाते हैं क़ी बंटी और बबली को अगर कोई पकड़ेगा तो सिर्फ मैं !! इस dialogue में कोई जान नहीं, जान है अमिताभ बच्चन के कहने के ढंग में ! ...और अपनी पेशानी छू कर अपने ऑफिसर का अभिवादन कर के अपनी jacket क़ी दोनों जेबों में हाथ डाले, चिन्गुम चबाते शान से ऑफिस से बाहर चले जाते हैं, अमित जी इस अदा को म्यूजिक क़ी जोरदार आवाज़ रेखांकित करती है, अमित जी क़ि चाल उनके बालों का स्टाइल जो पीछे से नज़र आता है, और मेरा शरीर सिहर जाता है ! '-अरे! ये तो वो ही आदमी है जो वर्षों पहले -फिल्म 'छोटी सी बात' में अचानक प्रकट हो कर हमें चौंका गया था !!' दूसरी बात सारी दुनिया जानती है  : "कजरारे"  !!!
फिर -परिणिता- में अमित जी ने अपनी अवाज्ज़ दी  
"_पहेली_" में एक गड़ेरिये के रूप में आते हैं!!
फिर सुभाष नगरे/ सरकार के बुलंद रोल में
 -सरकार-
बन कर फिर से तमाम जन-मानस पर छ जाते हैं, आँखों के भाव और चेहरे के ताव से यह सन्देश दे जाते हैं क़ि DON सिर्फ मैं हूँ _और रहूँगा !! _गज़ब का अभिनय ! _अविस्मर्णीय ! _अद्भुत !! _अद्वितीय !!!  इसमें अमिताभ बच्चन को filmfare best actor award का nomination मिला.
अगली फिल्म 'विरुद्ध' के मैंने सिर्फ चर्चे सुने हैं, फिल्म नहीं देख पाया हूँ.  फिर कुछ फिल्मे आईं लेकिन बिना कोई दस्तक दिए चली गईं वो थीं : रामजी लन्दन वाले, दिल जो भी कहे...,  लेकिन
 ***_एक अजनबी_*****
इस फिल्म से अमिताभ बच्चन की संलग्न तस्वीर जब से ये उपलब्ध हुई है, मेरे लैपटॉप, और मोबाइल के स्क्रीन क़ि शोभा बनी हुई है .
मैं "एक अजनबी" फिर देखने जा रहा हूँ , बाकि कल ...आएं!?
...जारी... 
आपका. 
 


 
 

Amitabh Bachchan aur Main # 24 se Aage...

You early Bird ! You stole My thunder !!!
…it’s just …as if U & me, …were…thinking on the same thought line at a time,… you posted earlyest because of MINE [crap!] net failuer !!! O_! U kill joy !!!
Amit Bahia ! Amit Bhai !! Amit Bhaia !!! ..the first lines of your this page made me so anxious, and a-little angry only on the damn net service privider !!!
Now my words after yours can be considered as a “boasting”!!
So,
namaskaar
please visit my blog
Shrikant

#25 
लोहरदगा  _थाना टोली/थाना रोड/Quarter   २९/सप्त/२०१०

श्री अमित भैया !!
सदर प्रणाम,  
कल रात से ही इन्टरनेट कोंनेक्ट नहीं हो रहा है....!!!
०३:१० दोपहर के बाद /जब नेट-कोंनेक्ट हुआ...
२००४ क़ि फिल्म "_वीर- ज़ारा_" के लिए अमित जी को - 'filmfare best supporting actor award ' का nomination मिला. क्यों? -क्यों न एक बार फिर इस फिल्म को अमित जी के चौधरी सुमेर सिंह के यादगार पात्र के लिए देखी जाये !!?
२००४ क़ि अमित जी क़ि अगली फिल्म थी "_ अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों _"  पता नहीं क्यों फिल्म के टीवी-promo , [-पहले सिनेमा-थियेटर में ट्रेलर भव्य रूप में पेश किया जाता था-], ने में फिल्म के लिए हमें अच्छी तरह से ये नहीं कहा क़ि यह फिल्म देखनी चाहिए !! मैंने यह फिल्म नहीं देखी हैं अत: कुछ कहना मुश्किल है.
जब यह दशक  प्रारंभ हुआ तो साल २००० अपने साथ जैसे विनाश ले कर आया !! इसी साल हमारे मालिकान में किशोर प्रसाद साहू क़ी एक अग्नि-दुर्घटना में असामयिक मृत्यु हो गई !! इनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने पटना से आये पारिवारिक मित्र और legal -advisor क़ी भी उसी समय मृत्यु हो गई जब वो वापस जा रहे थे !!! कुछ ही दिन बीते थे क़ी मेरी चचेरी-बड़ी-भाभी क़ी मृत्यु हो गयी !! इसी सप्ताह पटना जाने के क्रम में मेरी मारुती-वैन का भयानाक एक्सिडेंट हुआ जिसमे गाड़ी बिलकुल ध्वस्त हो गई और मैं जान से जाते बचा !!! लेकिन अपने जीवन के उस वक़्त के बड़े आर्थिक संकट में फंस गया !! परिवार में भी आपसी सामंजस्य में बाधाओं ने मुझे त्रस्त किया. इसी साल अमिताभ बच्चन अपने जीवन के ऐसे आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, जब समाचार के मुताबिक उन्हें उनके घर-प्रतीक्षा- के नीलामी क़ी अशुभ सूचना तक का सामना करना पड़ा !! यह समाचार मेरे शुभचिंतकों ने मुझे इस प्रकार सुनाया जैसे वो मुझे आश्वासन देना चाहते हों !! "...अरे जब अमिताभ बच्चन जईसन आदमी के रूपया-पईसा ला मुसीबत औउर घर नीलामी हो सकअ हई तो तोर का बात हउ !!" लेकिन मेरे लिए ये आश्वासन नहीं मेरा मज़ाक उड़ाने के लिए ही ज्यादा कहा जाता था जो मेरे कोई काम न आया, ...क्योंक़ि मुझे ऐसे-ऐसे लोगों के पास पैसे मांगने जाने पड़े जिन्हें कभी बाबूजी से सहायता पाने लिए उनके आगे-पीछे घूमते देखा था !! बाबूजी क़ी मृत्यु के बाद ही मुझे कम उम्र में ही जो जिम्मेवारी घर-परिवार ने दी थी वो ही अब जैसे मेरी हालत पर हंस रहे थे. और जो विरोधी थे उन्हें तो जैसे उनकी सारी जन्मों की तपस्या का फल मिल गया हो !! लेकिन फिर भी जीवन की रफ़्तार में कोई कमी नहीं आई थी. और बीतते समय के साथ समझौता कर मुझे इस जीवन की रफ़्तार का पीछ करना ही था, मैं नहीं चाहता था की आगे बढती तकनीकी दुनिया में -मैं और मेरे बच्चे किसी से पीछे रह जायं ! ... इसके लिए मुझे कितने कष्टों और घर-बहार के लोगों की कटु आलोचनाओं को सहना पड़ा और मुसीबतें उठानी पड़ीं. वह अवर्णनीय है_! ...मेरा ध्यान सिर्फ-और-सिर्फ इस आर्थिक-संकट से उबरने की चिंता में घुलते सालों लगे, ...लेकिन यह मेरे तकलीफों का अंत नहीं था !!     ....सन२००२ में शिव बाबु भी मर गए !!    ......अब मुझे सिनेमा आकर्षित नहीं करता था !! गीत सुहाने नहीं लगने लगते थे!! हसीं आने पर पहले आपनी हालत पर रोना आता था !! ...और माँ, वीणा यही समझती थीं की मेरे मालिकन सब ठीक कर देंगे !! ...कितनी भोली हैं ये !! आदमी हो कर आदमी को नहीं पहचानतीं !! ...मैंने घर पर अक्सर सुनने वाले गाने सुनने बंद कर दिए,  ...पढना-लिखना और चित्रकारी करना मैंने छोड़ दिया !!... मुझे नींद न आने की बीमारी हो गई,     शरीर भारी और बेडौल हो गया, चेहरे पर चकते से दाग और चर्बी लटक आये, सर से बाल उड़ने लगे, मुझे मेरी अपनी ही तस्वीर से नफरत होने लगी ! ...फिर मैंने दवाओं में पनाह पाने क़ि असफल कोशिश शुरू कर दी !! लेकिन यह न हो सका, इनसोम्निया insomnia : (-the condition of being unable to sleep:>>>to suffer from insomnia -) ने मुझे इतना त्रस्त कर दिया की अक्सर नींद की गोली खानी पड़ने लगी !!  
उधर... ...अमिताभ बच्चन ने यश चोपड़ा से काम माँगा!! **-मोहब्बतें_** फिल्म सुपर=हिट रही, फिर २००० में शुरू हुई "_कौन बनेगा करोडपति_" क़ि कामयाबी और उनकी अपनी सूझ-बूझ ने उन्हें उनकी सम्पूर्ण आर्थिक समस्याओं से निजात दिला दी, वे अपनी कम्पनी ABCL को तो ,कायम नहीं रख सके लेकिन अपने सारे कर्जे चुकता कर दिए और अपनी बिछड़ी हुई लोकप्रयता को फिर से दो-गुने, चौ-गुने स्तर पर पाने में कामयाब रहे ! वह दिन है और आज का दिन अमिताभ बच्चन देश के सवोच्च्तम धनाढ्य व्यक्तित्व वाले अपनी उम्र के एकलौते चहेते फिल्म-स्टार बन गए !!
...जारी...

Tuesday, September 28, 2010

श्री अमित भैया !
सदर प्रणाम.
हे असम्बोधानीय !!

आपकी अभी-अभी पोस्ट की गयी आपकी अपनी तस्वीर ने सारे भ्रम तोड़ दिए हैं!!

यह है मेरे अपने सच्चे अमित भैया !! शानदार ! सदाबहार !! दिलदार !!! आपको हमारा बेशुमार प्यार !!! इसी तरह आपके द्वारा खुशियाँ सारे जग में फैलती रहे ! हार्दिक शुभकामनायें !!
आपका अपना एक और हिन्दुस्तानी भाई, जिसे शायद आपके साक्षात् दर्शन का सौभाग्य नहीं, फिर भी आप का ये ही प्यार कम नहीं क़ि आपके इस ब्लॉग के द्वारा हमारी भावनाएं आप तक जरूर पहुँचती होगी !! शायद आप मुझे अपने ब्लॉग पर पढ़ते होंगे !! आपके प्यार भरे उत्तर की प्रत्याशा में_
ऐसी प्रत्याशा सारे देश की है, भैया !!
सप्रेम सदर प्रणाम,
स-धन्यवाद !!
-आपका,
श्रीकांत
http://shrikanttiwari.blogspot.com/

Monday, September 27, 2010

Amitabh Bachchan aur Main # 23 se Aage...

#२४
 लोहरदगा     थाना टोली/Quarter   २७/सप्त/२०१०     ०९:३३ सायं
श्री अमित भैआ! सदर प्रणाम,  
देवाधिदेव-देव-महादेव साम्ब-सदाशिव भगवान् भोले नाथ जी की कृपा से कल शाम फ़ोन द्वारा समाचार मिला की हमारी उर्मिला दीदी "दादी" बन गयी-!! बड़े जीजाजी ने फ़ोन पर अपने सदाबहार उल्लास भरे ठहाकों के साथ मुझे यह शुभ-संवाद सुनाया क़ि उनकी बड़ी बहु कंचन ने पुत्र को जन्म दिया है-!! यह समाचार सुनकर हमारे पुरे घर में प्रसन्नता फ़ैल गई-!!!
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   २००४ की अन्य फिल्मो 'रुद्राक्ष', 'इन्साफ' में अमित जी की आवाज़ थी.
"_देव_" को देखना लाजिमी था क्योंकी यह हमारे देश के ख्याति प्राप्त फिल्म निर्देशक श्री गोविन्द निहालानी जी की फिल्म थी जिसमे अमिताभ बच्चन मुख्य पात्र डी.सी.पी. देव प्रताप सिंह की भूमिका में थे, को-स्टार्स भी सभी नामी कलाकार थे. सबकी अच्छी मेहनत के बावजूद फिल्म आम दर्शकों में नहीं चली. लेकिन इस फिल्म को Critics Award Best Movie
 से सम्मानित किया गया, और फिल्म की नायिका करीना कपूर को Critics Award Best Performance का अवार्ड मिला 
२००४ की अगली अमित जी मोजूदगी वाली फिल्म "_लक्ष्य_" थी, जो कारगिल/(कर्गिल) युद्ध पर आधारित थी. इस फिल्म से भी भारी उम्मीद थी - फिल्म की कहानी, कलाकारों का अपना-अपना प्रदर्शन, निर्देशक का निर्देशन, गीतकार के गीत, संगीतकार का संगीत - एक सफल और हिट फिल्म होने के बावजूद यह फिल्म भी कोई कीर्तिमान स्थापित नहीं कर सकी. - प्रीतीश -(मेरे सुपुत्र जिम्मी)- को इस फिल्म का गाना "...कन्धों से मिलते हैं कंधे , क़दमों से कदम मिलते हैं, -हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं...!"  खूब पसंद आया, जिसे वह उस वक़्त हमेशा सुना करता था. इस फिल्म में अमित जी ने -कर्नल सुनील दामले- की भूमिका निभाई थी
***********************************
इसी साल ०७, नवम्बर`२००४ को हमारी मुनिया रानी नन्ही शरिष्ठा का जन्म रांची में हुआ. जन्म लेने कुछ ही मिनटों के बाद उसकी फोटो मेरे भाई ने खीची थी जिसमे उसका एक देवी-सा स्वरुप दिखता है.वह फोटो अभी मिल नहीं रहा, शायद कहीं दूसरी जगह पर रख कर भूल गया हूँ  फिर भी उस तस्वीर की अनेकों कॉपीयां हैं, मिलते ही यहाँ शामिल करूँगा. स्व.बाबूजी की बेटियों के बाद, ४० वर्षों के अंतराल के बाद हमारे घर में बेटी ने जन्म लिया. मैंने उसी समय अपना नया डिजिटल कैमरा ख़रीदा था जिससे मैंने अपनी बिटिया, जिसे मैं प्यार से बगुना या फ़गुनी कह कर पुकारता हूँ, की अनेकों तस्वीरे खींची जिसमे से सबसे ज्यादा हसोड़ (most humerus) फोटो मैं यहाँ जोड़ रहा हूँ. इस तस्वीर में बाबूजी, कमल एवं मेरे बेटे क्षितिज (-सन्नी-) की मिलीजुली-सी झलक है, और हंसी तो बिलकुल बाबूजी सी ही मजाकिया स्टाइल में है - जरा देखिये :- 
 अब तो यह काफी बड़ी हो गयी है, और बहूत ही खूबसूरत गुडिया सी हंसी के साथ हमें भी हंसाती रहती है. रांची के विशोप-वेस्टकॉट स्कूल में इसका दाखिला कमल ने करवा दिया है जहाँ वो अभी अपने डेरे से ही स्कूल-बस से ही जाती-आती है. इसी के जन्म के कुछ दिन पहले मैंने घर के लिए एक डेस्कटॉप कंप्यूटर ख़रीदा था.  
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२००४ की फिल्म "_दीवार_"  !!  
अमिताभ बच्चन (मेजर रणवीर कॉल) ने मनोवांछित अभिनय के द्वारा हमें प्रसन्न कर दिया. यह फिल्म पाकिस्तान में फंसे पुराने हिन्दुस्तानी युद्धबंदियों की कहानी थी, जिन्हें हर हालत में अपने वतन 'भारत' वापस लौटना था. 
इसी समय अमित जी की एक और फिल्म आई '_क्यों ! हो गया न !_' और चली गयी, मैंने देखा नहीं है. 
अमित जी की अगली फिल्म थी "_हम कौन हैं_" यह फिल्म एक प्रायोगिक फिल्म थी जिसकी कहानी को आम जनता जब तक समझती फिल्म ख़त्म हो जाती है.[On the whole, HUM KAUN HAI? is more of an experiment that may find its share of believers and non-believers. At the box-office, the film caters to the multiplex-going audience completely. However, the sudden release and lack of promotional build-up will curtail its prospects largely. Ratiing >1 &1/2]  स फिल्म के थोड़े से हिस्से में धरम पा जी के दुर्लभ दर्शन होते हैं, बस्स... उसी से थोड़ी ख़ुशी मिलती है. 
 इसके बाद वीर-ज़ारा के चौधरी सुमेर सिंह [अमिताभ बच्चन] ने अपनी पत्नी सरस्वती कौर [हेमा मालिनी] के संग तो अपनी पूरी audience को  झुमा कर मस्त कर दिया. 
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क्षमा करेंगे, अतुल [लड्डू] महादेवी वर्मा जी की ३ कविताये मुझसे पूछ रहा है, उसकी क्लास-टीचर ने घर से इन्हें लिख कर लाने का टास्क दिया है. उनमे से एक आपके लिए_

"_आंधी आई जोर-जोर से
डाली टूटी है झकोर से
उड़ा घोंसला बेचारी का
किस-से अपनी बात कहेगी
अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी? 

घर में पेड़ कहाँ से लायें
कैसे यह घोंसला बनायें
कैसे फूटे अंडे जोड़ें 
किससे यह सब बात कहेगी
अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी?"
                                                             - महादेवी वर्मा. 
-शेष कल,
आपका कल आज से बेहतर हो!!
(मैं गरीब और कुछ आपको क्या दे सकता हूँ!) 
सुदामा-! जो अर्जुन बनना चाहता है-!!!
-आपका अपना ही भाई,

    
 

Sunday, September 26, 2010

Amitabh Bachchan aur Main # 22 se Aage...

#23
लोहरदगा      थाना टोली/Quarter      २७/सप्त/२०१०  ११:४४-सबेरे का समय
"_पिता धर्म: पिता स्वर्ग: पिता हि परमं तप: l
पितरी प्रीति मापन्ने प्रीयन्ते सर्व देवता: ll_" (४७/९ पद्मपुराण) 
______________________________________________________
मैंने अपने जीवन में जितना देखा समझा और जाना है उसके अनुसार अमिताभ बच्चन की पितृभक्ति अद्वितीय है . अमिताभ बच्चन के सामान पुत्र, पति और पिता सौभाग्यशाली को ही मिलता है. इस प्रकार से  अमित जी के माता-पिता, जया जी, अभिषेक एवं श्वेता जी सचमुच बहुत सौभाग्यशाली हैं.
देश अमिताभ बच्चन जैसा पात्र पाकर गौरान्वित  है.
-सो ! पुत्र, पति, पिता और पात्र अमिताभ बच्चन सचमुच हमारे "_PAA_" हैं
__________________________________________________________
श्रीकांत तिवारी 
   
Prateeksha, Mumbai April 27, 2008   12:13 am

The day started early as always. Somewhere my father’s words haunt me. He rose early every day and after his morning formalities would set off on his morning walk, waking me up to study. If i dithered he would recite in Sanskrit -

“Suryodaya chya ast maye, chasha enam,
Jahaati lakshmi, rapi chakra vartinam”
Surya uday hone ke baad aur asth hone se pahle, jo insaan sota hai, uski lakshmi chali jaati hai chahe woh chakravarti raja hi kyun na ho.
After the sun has risen and before it sets, the one that sleeps, shall loose all his wealth even if he is a wealthy and devout Raja or King.
Amitabh Bachchan 
*****************************************************
आज अमित जी ने अपने ब्लॉग में फिल्म "_ब्लैक_" कि चर्चा की है, जिसके बारे में मैं इस लेख-माला में आगे अपनी बात कहूँगा. 
#21  में मैंने अमित जी की फिल्म "_बूम _" के लिए अपनी उसी भावना का इजहार किया है जो अमित जी का प्रत्येक प्रशंसक करेगा, फिल्म का उद्देश्य मनोरंजन है तो वो इस वाहियात फिल्म में नहीं था ! सिर्फ और सिर्फ घटियापन था !
२००१ की आमिर खान की फिल्म "_लगान_" में अमित जी नरेटर/कथावाचक थे,  ऐसा अमित जी ने अक्सर किया है और हमें ख़ुशी होती है. २००३ में भी 'ख़ुशी' नामक एक फिल्म में अमित जी नरेटर थे, इसीतरह 'मुंबई से आया मेरा दोस्त' नामक एक फिल्म को भी अमित जी ने अपनी आवाज़ दी थी.
बचपन में देखी अमिताभ बच्चन की फिल्मो में मैं उन्हें अपनी ही उम्र का समझ कर खुश होता था, जो समय के साथ कब -बड़े भाई- बन गए पता ही न चला, और अब उन्होंने -FATHER FIGURE- अख्तियार कर लिया है.
लेकिन मुझे तो साफ़-सुथरे चिकने (-clean -shaved-) अमिताभ ही भाते हैं. और मैं उसी याद के सहारे जिंदा रहना चाहता हूँ. क्योंकि उन यादों में मेरे बचपन के साथ मेरे बाबूजी भी शामिल हैं !  
अमिताभ बच्चन ने -FATHER -FIGURE - अख्तियार किया २००३ की स्व. बी. आर. चोपड़ा की, रवि चोपड़ा द्वारा निर्देशित बहुचर्चित फिल्म :


"_बाग़बान_" से!
-'बाग़बान'- में अमितजी की हेमा मालिनी जी के साथ उनकी जोड़ी ने धमाल कर दिखाया, बड़ी उम्र के कलाकरों की तो बात ही छोडिये वर्तमान के नवजवान फ़िल्मी जोड़े भी आइंदे ऐसा कमाल नहीं दिखा पाएंगे, हेमा जी के साथ अमित जी की जोड़ी को इस फिल्म के लिए 2003 – Star Screen Award Jodi No. 1 along with Hema Malini for Baghban से सम्मानित किया गया. फिल्म का होली गीत "...होली खेले रघुवीरा अवध में, होली खेले रघुवीरा...!!" में अमित जी का स्वाभाविक उत्साह देखते बनता है, और बाकि पूरी फिल्म में ६० वर्षीय अमित जी और हेमा जी का अतुलनीय शानदार अभिनय का तो कहना ही क्या !! वाह !!! फिल्म का कथानक दर्शकों को आत्मविभोर कर देता है. इस फिल्म के लिए अमित जी को filmfare best actor अवार्ड का nomination मिला. २००३ की फिल्म फंटूश में अमित जी की आवाज़ थी.
२००४ में आई राज कुमार संतोषी की बहुचर्चित सुपर-हिट फिल्म  
 "_खाकी_"
जिसके बुजुर्ग डी. सी. पी. अनंत कुमार श्रीवास्तव  के रूप में अमित जी ने अपनी अद्वितीय अभिनय प्रतिभा और एक्शन से हम  सबका फिर से दिल जीत लिया. इस फिल्म के लिए पुन: अमित जी को filmfare best actor आवर्ड का nomonation मिला. "_खाकी_" में अक्षय कुमार की भूमिका भी बहुत-बहुत पसंद आई, तुषार भी जमते हैं, इस फिल्म ("_खाकी_") में अजय देवगन ने -खलनायक- की भूमिका बड़ी खूबसूरती से निभाई, और जिसमे ऐश्वर्या राय बच्चन एक चोंकाने वाली भूमिका में थी !! "_खाकी_" मेरे लिए इस दशक की सबसे ज्यादा पसंद फिल्मो में से एक है, क्योंकि इस फिल्म में अमिताभ बच्चन की दाढ़ी नहीं थी...!! मूंछ थी, उसी के चलते तो ज्यदा बुजुर्ग लगे.
२००४ की फिल्म "_ऐतबार_" ने कुछ विशेष आकर्षित नहीं किया लेकिन अब अमिताभ बच्चन की उपस्तिथि भी बहुत बड़ी बात समझी जाने लगी, लगा जैसे फिर वो ही पुराने दिन फिर से आ गए जब फिल्म में अमित जी का नाम भी जुड़ा होना हिट फिल्म की गारंटी समझी जाती थी. 
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-: थोडा सा आराम :-
...जारी... 

२००७, ११ मार्च को अमित जी को

*****_सुपरस्टार ऑफ़ दि मिल्लेनियम_*****
के पूर्व-घोषित सम्मान से नवाज़ा गया

 

Amitabh Bachchan aur Main # 21 se Aage...

श्री अमित भैया,
#22
26+ ki umar mein hi mere upar apne parivaar ki jimmewari aa gayi, jiske har bhale aur aachhe kamon ko mujhe sirf akele hi niptaana tha aur akele hi bure ki jimmewari bhi jhelni thi, ...20 varshiya Kamal ke career ki bhaari chinta ne mujhe khoob active toh kiya lekin  hamare paas aisa koi bada kaam ya avasar/opportunity tha hi nahin jo hamein ubaar leta, ...Kamal hamaare beech hamari aakhiri ummeed tha, ...sanyogvash iss bachche ka padhai mein khoob mann laga aur issne MBA ki padhai ke liye di gayi entrance test pass kar liya, ...maine bade utsaah se isska dakhila Rourkela, Odissa ke MBA college mein karwa diya. 
...meri naukri marte hue Babuji se mujhe mili aakhri aagya aur aashirwaad thi, uska bada sahara yeh mila ki hamaara thana toli ka milikan ka diya quarter kayam raha, issi quarter mein Babuji ki sabhi santano ka janam aur yahin se meri sabhi bahno ki bidaai hui hai, ...jissme hamara bachpan beeta tha, ...woh sabhi khatti-meethi yaaden judi hain jinhe main aapse share kar raha hoon,  ...aur bhi woh sabhi sahuliyaten bhi kayam rahin jo Babuji ki zindagi mein hame hasil thin, ...nuksaan yeh hua ki mere vyast ho jane se hamare apne karobaar ( jaise Veena Vastralya, Vidya Niketan -book&stationery-, aur Kamal Stores -general goods- ki Dukaane ) ko Manjhle Bhai Shashi se na sambhal saka, baad mein Madan Jijajee ke mashwire aue Shashi ki hi khwahish par mere apne prayas se ek S.T.D. booth "-SANDESH-" (-iske main Sw. Kishore babu aur Uday Babu ka aabhari rahunga-) khola gaya, jisme Shashi ko mann laga, ...uss-se utsahit ho kar hum-ne thoda karobaar se kamaa kar aur bank se loan le kar ek Maruti-Van ki kharid ki, jise hum-ne bhaade par dene ka kaam shuru kiya, ...badkismati dekhiye ki S.T.D. booth ki machine -thunder's-lightening/bijli girne se jal gayi, ...aur patna jane ke kramm mein Maruti Van ka bhayanak accident ho gaya jise driver chala raha tha, ...main marne se toh bach gaya lekin meri bayin kuhni mein multiple fracture hua jiska Patna mein oppration karwana pada, kuhni ki haddityon mein steel lagayi gayi, ...inn durghatnaon ke pahle Shashi ke putra Govind (-sanu-) ka janam 01/Apr/1994 ko ho chuka tha, ...baad mein 08/oct/1997 ko mere teesre bete Atul (-Laddu-) ka janam hua, ...Kamal MBA mein apne achhe results aur mehnat ke dum par safal raha aur ek medicine company ko -join- kar liya, ...Babuji ki apratyashit asamayik mritu! accidents! gaano ki zameen ke bantwaare! aur karobari ghate! ne hame barbaadi ke kagaar par la khada kiya, ...jiske karan frustration mein aa kar baad mein Shashi ne karobar band kar diya aur ek local petrol pump par counter clerk ki naukri pakad li. 
07/May/2003 ko kamal ki shaadi Roopa se hui. Babuji ke nidhan ke baad yeh hamari pahli khushi ke pal thhe, 07Dec/2004 ko hamari nanhi-munni (kamal's doughter) Sharishttha [-gungun-] ka janam hua jo aaj Ranchi ke Vishop Westcot School mein padhne jati hai, ...Babuji ke aashirwaad se hamaare sabhi bachche honhaar nikle, padhai-likhai hi mere jeewan ka ek matr uddeshya ban gaya, achhi shiksha haasil karna aur uske sahare kaabil ban-na yeh mera mool-mantr ban gaya, ...sanyogvash Jimmy, Sunny ki padhai se hum aasanwit thhe, ...Kamal ne Jimmy ko apne saath rakha, aur competition ki taiyari karwai, ...Jimmy 2009 ki WBJEEE mein qualifying rancking paane mein safal raha, ...aaj woh Asansol Engineering College se Computer Science & Technology ki padhai kar rha hai, ...Sunny, Kamal ke saath uske peechhe hi hai, shayad 2011 mein...
...aur jeewan fir aage badh chala...
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Amitabh Bachchan ko meine kabhi bhi apne se alag nahin hone diya. 'Khuda Gawaah' ke baad ek baar kamal ne fan-mail ke jariye unki autographed tasweer aur foth-coming movies ki list mangwai jiss-se maloom hua ki Amit ji fir se filmon mein active hone wale hain. Jab Amit ji ki filmen der se aane lagin toh mera dhyan Hollywood ki filmon ki taraf gaya (-Amitabh Bachchan ke alave mujhe koi doosre ki Hindi film badi mushkil se pasand aati hai-), aur mujhe James Bond series ke alave Arnold Schwarzenegger, Sylvester Stallone, Tom Cruse, Keanu reevs ...blah, blah, blah... ki filme jyada bhane lagi. 
Afsos ki baat yeh hai ki Amit Ji ko unke apne jeewan ki katthinaiyon ne unhen pareshan kar diya tha, unki company ABCL kamyab na ho saki. Aagami filmon se bhi kuchh badi baat ki ummeed nain thi, 
...1994 ki Insaniyat flop ho gayi,
    ...fir kuchh varson ka andhera..., 
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...1997 ki "_Mrityudata_" 
hai re khoti akkal !! 
[-_Mrityudata is a 1997 Bollywood film directed by Mehul Kumar. The film is considered to be a comeback role for Amitabh Bachchan who temporarily left the industry in 1992. This film was produced by his own production company called Amitabh Bachchan Corporation Limited (ABCL) It marked Amitabh Bachanan's comeback after five years but was a flop at the box office_-] flop ho gayi,
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...1998 mein aai Tinu Aanand ki nirdeshit nirashajanak flop film "_Major Saab_" flop again !!! 
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1998 mein David Dhavan jo comedy film Govinda ke sath hi bante thhe ne achanak Amitabh Bachchan ko le kar sabhi ko hairat mein dala ki ki ab kya!?  Amitabh Bachchan ka ek bayan padhne ko mila ki :darshak iss film ko dekhne se pahle apna deemag ghar par chhod kar film dekhne toh sahi aanand le sakenge, hum-ne aisa hi kiya aur 
 "_Bade Miyan Chhote Miyan_"
[This movie was the 1st Hit of Amitabh Bachchan at the box office since his comeback after a few years of hiatus from Bollywood. A remake of the Hollywood film Bad Boys]
-: Mere ko Jayada kuchh nahin kahna:-
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Amitabh Bachchan kahin gahre dhanste chale ja rahe thhe. 1999 "_Laal Badshah_" [ ...This was Bachchan's third film since his comeback after a five year hiatus; it failed at the box office....]
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1999 "_Suryavansham"_
[-Although the film was a box office flop critics hailed Amitabh Bachchan's performance as his best ever since his comeback in 1997. -]
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Hai re barbaadi ki parakashttha! Jaise koi khud apna dushman ban gaya ho!
1999 mein Hit naam ki sabse badi flop!
"_Hinsustaan Ki Kasam_"
super-duper floppp!!! chhih:!!!
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1999 Amitabh Bachchan ki last clean-shaved chehre wali film hai ! kahte hain :- "...hum hain banaras ke bhai"..iah ! issiliye dekh lo !
"_KOHRAM_"
purani yaad dila kar tthagne ki koshish 
Only one show wonder!
flop!
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 Shayad yehi hon tha. Yeh bhi ek daur hai, woh bhi ek daor tha! Amitabh Bachchan ne apne umar ki wajah se apne khud ke cuhre ko shayad pasand nahin kiya aur kisi ke kahne par ya khud soch kar apni daadhi badha li, jiske pohoto samay-samay par magazines mein chhapa karte thhe. Ek baar padhne ko mila ki unhone swayam Yash Chopda se "_Kaam Maanga_"___!!!  
aur chamatkaar ho gaya!!!
Yr. 2000-2010
tab ka din hai aur aaj ka din
dekhiye sab kuchh aapke samne hai!
Amitabh Bachchan ne iss dashak mein Haiwan se le kar Bhagwan tak ki sabhi bhumikyen nibha dalin. AMITABH BACHCHAN NE WOH SABHI SARE AWARDS JEET LIYE JO AANE WALE VARSHON MEIN KABHI KOI DOOSRA JEET BHI NAIN SAKEGA !!!
Yr. 2000 - Mohabbatein bhumika-Narayan Shankar- Super Hit !!!
  2000 – Superstar of the Millennium: Filmfare Special Awad

Kaun Banega Crorepati (Hindi: कौन बनेगा करोड़पति Kaun Banegā Karoṛpati; popularly known as KBC) is an Indian reality/game show based on the UK gameshow Who Wants to Be a Millionaire?. This version's title literally translates to "Who will be a ten-millionaire?". The show first aired in 2000 and was hosted by Amitabh Bachchan. This was the first appearance of Bachchan on Indian television. The show was hugely popular in India.

Amitabh Bachchan (actor) - crowned as "Superstar of the Millennium"

Yr. 2001- Ek Rishta bumika- Vijay Kapoor-  Flop !
Yr. 2001 Aks bhumika-Manu Verma - Super Hit !!! Amitabh Bachchan :- Winner : 1. Filmfare Critics Award For Best Performance ! 2. Nominated : Filmfare Best Actor Award !
iske baad ... !!!  Yr. 2001  
 Kabhi Khushi Kabhi Gham  
 bhumika -Yashvardhan "Yash" Raichand 
-Super-Duper Hit!!!  
"...O..shaaba-shaaba...!!!"
Amitabh Bachchan ka ghazab ka performance !!!
Amitabh Bachchan :- Nominated : Filmfare Best Supporting Actor Award !
*****
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Yr. 2002 Aankhen -bhumika Vijay Singh Rajput - Super Hit !!!  
Amitabh Bachchan :- Nominated : Filmfare Best Supporting Actor Award !
Yr. 2002 Hum Kisi Se Kam Nahin :- bhumika-Dr.Rastogi - Flop !
Yr. 2002 Agni Varsha bhumika -Indra (GOD) [Spc.App] -Flop !
Yr.2002 Kaante bhumika-Yashvardhan Rampal/"Major" - Flop !
Yr. 2003 Armaan bhumika-Dr.Sidharth Sinha - Flop !
Yr. 2003 BOOM bhumika-Bade Mia - राम!राम!!राम!!!Chhi-Chhi-Chhi!!! ___wye.!!!
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खेद की बात है कि अमिताभ बच्चन  के पिताजी कवि श्री हरिवंश राय बच्चन जी का १५ जनुअरी २००३ को देहावसान हो गया.
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...जारी...

Uday Babu

श्री उदय शंकर प्रसाद
 
the picture/image of Shri Uday Shanker Prasad is edited & persented by: 
अपने जीवन में मैंने देखा, परखा और जाना है कि इनके व्यक्तित्व में देव-तत्व है.  मनुष्य हैं पर देवत्त्व हैं. 

                                                    

Saturday, September 25, 2010

Amitabh Bachchan aur Main # 20 se Aage...


Sadar Pranaam,
Babuji ke asamayik nidhan ke saath hi hum sabka bhi aant ho gaya. Ab jo hona tha naya, anjaana, aur darawana hi hona tha, koi taiyaar nahin tha, kisi ne bhi koi mukaam hasil nahin kiya tha, sabhi kum-umar ke anubhawheen aur masoom sirf Babuji par hee nirbhar thhe, Babuji ki jab tabiyat kharab hui thi tab Veena pregnant thi, waisi durdasha ki stithi mein 29,August`1993 ko Mere Doosre bete Kshitiz (-sunny-) ka janam hua. Hum Vellore se nirash laut aaye thhe, doctor ne kaha tha ki unhe ghar, apne parivaar ke beech le jayen taki sabhi unke darshan kar saken, doctor ke kahe mutabik ab Babuji sirf 10 din hee jee sakte thhe, laute samay train mein Babuji mujhe apalak dekhte hue achanak bole  ^^dÃls jgcv y®x\** "...kaise rahaba log?"how will all you live?" ...yeh Babuji ki mujhse kahi aakhiri shabd thhe, ...kitni chinta thi unhe hamaari! ...apni bimari ki dasha se jyada woh iss baat se trast thhe ki unke baad hamaara kya hoga! ...woh jante thhe, ...sabhi ki neeyat aur fitrat ko jante thhe, ...issiliye kyonki waqt rahte woh hame surakshit nahi kar paye thhe (na hi hum self-made well-established thhe), issiliye unhe hamaari fikar thi, ...brain tumer, jo cancerous ho kar la-eelaaz ho gaya tha, ke karan unke sharir ka poora baayan hissa paralise ho gaya tha, sabse jyda khraab baat yeh hui thi ki aakhiri 15 dino mein woh bol bhi nahi sake, ...27,Aug`1993 ko hum wapas aaye, Ranchi railway station par Kamal (Gabudan-Mere Chhote Bhaai) ko dekhte hi woh ajeeb dhang se awaaz nikaal kar chillane-rone lage, ...Lohardaga aane par unki seva-dava ke dauraan hi Veena ko pregnancy ke karan hospital le jana pada tha, ...bachche ko ghar la kar rasme puri karne ke baad uss navjaat baalak ko bimaar, -mrityu-shaiya-  par pade Babuji ke paas aashirwaad ke liye auraten le gayin, babuji ko bachche ke janam ki baat malum thi, woh utthne ki koshish karte hain jinhe hum sahara dete hain, ussi apni dayaneeya awastha mein sirf ek haath se hi babuji ne Sunny ko apni god mein le liya,... aur kuchh hoon...aaan...haan jaise shabdon ke beech bole "-party!"  Unki uss dasha ke bawajood hum muska padte hain, ...Bachha swasth tha lekin jo jaruri ehatiyaten/sawdhaniyan jo baratni chahiye thin woh manage na ho saka, ...fir delivery ke karaan aur Babuji ki chinta mein Veena abhi kaafi kamjor thi, ...bachche ko pneumonia ho gaya ...jiska eelaz kiya gaya, ...aisi hi durawastha mein Babuji ko milne, dekhne muhalle ke sabhi log, unke karmachari-sathi-staff -MALIKAAN aate thhe. Babuji badi besabri se nishchit maut se lad-jhagd kar apne MALIKAAN mein se Uday Babu (Uday Shanker Prasad) se milne ke liye hi jaise zinda thhe, ...Uday Babu shahar mein nahin thhe, ...unke Lohrdaga aane ki khabar hame mili thi aur Babuji ko pata tha ki aaj (4/sept/1993) woh Lohardaga aayenge, ...Uday Babu unki aakhiri ummeed thhe jo hame kisi bhi anisht se bacha sakte thhe, ...aane par Uday Babu ne mujhe agle din bulaya aur sabhi jankari li, bole ki "...chaliye hum aate hain", hum-ne jaise-taise kamre ko vyawasthit kiya jisme Uday Babu apne chhote bhai Sw. Kishore Prasad Sahu ke sath padhare aur Babuji ko dekh kar unse phuhhe ki "...kuchh kahna chahte hain?" ...lekin Babuji ki haalat tab tak bahut kharaab ho chuki thi, woh sirf itna hi bol paye "...Babu!..." aur meri taraf ishara kiya, jise ghar ke logon ne samajh kar Uday Babu se baaten ki,  ...Uday Babu ne babuji ko ashwasan diya ki woh -mujhe- Babuji ki jagah "-naukri-" de denge, aur chale gyae. Agle din (5/sept/1993) Uday Babu ne mujhe bula kar jaruri baaten puchhi aur kahi, tab unke bade bhaia Sw. Shiv Prasad Sahu (Ex-M.P. Ranchi) bhi wahan apne chhote bhai Sw. Kishore Sahu ke saath maujood thhe, meri naukri pakki kar di, aur Shiv Babu ke bade bete Sanjay Sahu se milwaya ki "...ye Tiwari Ji ke ladka hain, Tiwari ji wala kaam karenge." Uday Babu ne mhjhse puchha ki "...kab se kaam par aaiyega?" maine Babuji ki kharab tabiyat ka hawala diya ki unki seva-sushrusha mujhe hi karni padti hai aur dawaiyan bhi Babuji ko main hi khilata hoon, tab unhone mujhe fursat de kar Babuji ki seva mein bhej diya, ...ghar aa kar yeh baat maine Babuji ko batai , sun-ne se pahe woh bade udwigna aur utkantthit dikh rahe thhe, lekin meri baat sun lene ke baad woh shaant se dikhne lage, ...agle din (6/sept./1993) sabere hi main Laal sahab ke paas Masmano chala gaya jo homoeopathy se eelaz ke liye jane jate thhe aur Vellore se aate hi hum jinke sampark mein thhe, ...uss din Laal sahab ne mujhse kaha "...ab kya dava den!?...ab toh haare ko hari naam hi kahiye!" Babuji ji ke liye chintit aur uljhan ke karan -ya- agyanta ke karan baat ka arth main samjh nahin saka, ...Laal sahab ke yahan se aane ke baad maine brush kiya aur nashte ke liye Maa ne awaaz di, ...Babuji ke paas uss waqt Murari Mama thhe, ...maine pahla nivala utthaya ki Murari Mama ki bhayabheet cheekh goonj utthi :
"...Didiyaaaaaa!!!" 
...main nivale ko fenk kar Babuji ke kamre ki or bhagta hoon, ...Babuji ki aankhen tyorayi hui thin, ...gale se gharrrahat ki darawani awazz nikal rahi thi,
...kohraam mach gaya!!
...na jane kaise itni bheed jama ho gayi!, ...mujhe bheed mein Uday Babu dikhte hain!, main unki or aasha aur ummeed ki nazaron se dekhta hoon! '...shayad yeh Babuji ko bacha len!', ...fir daud kar unke dono pair pakad kar khoob rone laga, unhone aur doosre logon ne mujhe yeh kah kar sambhala ki "..aap bade hain kamjor hoiyega toh pure parivaar ko kaun sambhalega!!?" ...Maa, Shashi, Kamal, Mama, Veena, Pushpa sabhi parivaar Babuji ke sharir par ro-ro kar kalapte hue pachhad kha-kha kar gir rahe hain, unse na jane ka nivedan kar rahe hain, Maa duhai de-de kar haath jod rahi hai, "...doctor ko bulao!...doctor ko bulao!" Maa jimmy ko samne kar ke Babuji se bheekh maang rahi hai, "...Jimmy aatankit hai ki kaya ho gaya hai!?" '...Baba!...Baba!' kahte apne nanhe haathon se unhe chhuta hai,  main Babji ki kabhi chhati toh kabhi paano ke taluwon par apne haath se malish karta hoon,  ...achanak fir Babuji ka Badan jor se ayenthaya!, ...unki jihva aur aankhen jaise bahar ko ubal padin!, ....fir jor se tadap kar Babuji ka sharir shithil pad jata hai, ...aankhen Ishwar ki tasweer ki or ghoorti si pathraa jati hain, aur ussi ke saath main bhi patthar sa jadwat ho jata hoon.
...Shashi cheekhta hai :
'...Babujieeee!" 
...tabhi doctor aata hai aur Babuji ki nadi ki jaanch kar ke unhe mrit ghoshit kar deta hai., ghor rudan-krandan ki cheekhen foot padti hain, Dr. Bisu Babu aate hain aur mijhse kahte hain ki "...achha hua, inhone takleef na jheli na tum-logon ko takleef mein dala, issliye ab aage ka kaam sambhalo." 
Antim sanskaar ke baad Babuji ki asthiya le kar Shashi (hamara manjhla bhai, jise Vellore jate waqt 15,August`1993 ko Ranchi Rly. Jn. par Babuji ne aakhiri baar train ki berth par se lete-lete dulaar kiya tha) Varanasi chala gaya. Ghaat se ghar lautne par -jimmy- jo mujhe dhoondhta fir raha tha, usne mujhe pahchana hi nahin! ...kyonki meri munchhen aur mere sar ke baal munde hue thhe!
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 Babuji ke nidhan ke kuchh hi dino baad unke bade bhai -hamare chacha-, -chachere bhai-, aur -bhabhiyon- ne hamse durvyohaar ka ghrinaspad namuna pesh kiya aur gaano ki property ke bantwaare ki baat uus bade chachere bhai ke munh se nikli jiska pura wajood/astitva hi keval Babuji ki hi den tha, Jiska paalan-poshan Babuji ne hi ussi kamre mein rakh kar kiya tha jisme unke pran nikle thhe, aur jiski shiksha yaheen Lohardaga ke B.S. College mein hui thi, ...kuchh saalon ki pareshaniyon ke baad jab hame kisi ki koi madad nahi mili tab majboori mein ek panchyat arrenge hui jisme hame gaano ke ghar se be-ghar hona pada, rah gaye sirf chand bighe zameen. 
________________________________________________________
...mere kano mein Babuji ki awaaz aati hain : 
dÃls jgcv y®x\
.kaise rahaba log?  
how will all you live?
 
eq>s r¨ yxrk gS] ckcwth vÒh Òh fpafrr gSa A
                dk'k ! vferkÒ cPPu tSlk esjk d¨b cM+k Òkà g¨rk !
                                                                   Mujhe toh lagta hai Babuji abhi bhi chintit hain. 
                                                         Kaash ! Amitabh Bachchan jaisa koi mera bada bhai hota !

Superstar of the Millennium

 2000 – Superstar of the Millennium

 Amitabh Bachchan (actor) - crowned as "Superstar of the Millennium"


Amitabh Bachchan named Superstar of the Millennium. http://www.geocities.com/anisharaja/ssawd.html
Retrieved 11 March 2007.



Shrikant Tiwari

Pitripaksh : 2010


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24/Sept/2010
MAHAALAYA/PITRIPAKSHAARAMBH

YAH 15 DINO KA WOH SAMAY HAI JISME VYAKTI APNE PURWAJON-PITARON KO PIND-DAAN, AUR JALAANJALI DWARA TARPAN KAR KE APNI SHRADDHA SAMARPIT KARTE HAIN.

Shrimad-padm-puran se: 

"pita darmah pita swargah pita hee paramam tapah I
pitari preeti-ma-panne preeyante sarva deavtah II" (- 47/9-padmapuraan)
 

PITA DHARM HAI, PITA SWARG HAI AUR PITA HI SRVOTKRUSHT TAPASYA HAI,
PITA KE PRASANNA HO JANE PAR SAMPOORN DEVTA PRASANNA HO JATE HAIN.
 

"_om-shri-pitri-deve-bhyo-namah_"
 

-: twam-pahimaam sharanagatam :-
 

aapko hamaara pranaam !!
 

 Shrikant Tiwari
Thana Road, Lohardaga.

s
SssssssSSSSSSS

Friday, September 24, 2010

Amitabh Bachchan aur Main # 19 se Aage...

#20
Lohardaga     24 sept. 2010     02:25PM     Thana Toli/Quarter

Hamara desh Hindi-Filmi-Darshakon Ke Liye Bhi Prasiddh Hai. Lekin Dukh Hai Ki yehee Hindi-Kalakaar English ko hi jyda byohaar mein laate hain, yeh ek bidambna hi hai!! 'Aam-Bhartiye-Darshak' jo puri duniya bhar ke cine/film darshakon mein sabse badi jansankhya hai - ne 1985-1990+ tak TV ko optional medium of intertainment  ke taur par puri tarah se swikaar kar liya tha, jo ek ati-awashyak vastu ki sangya se sammanit kiya jane laga. Isse puri tarah se sthapit kiya "RAMAYAN" aur "MAHABHAARAT" jaise TV-serials aur "cricket" ke_'live' telecast  ne!! Bhartiya Darshakon ne waqt ki jaroorat se jyada isse ghar ki jarurat maan liya, aur issi par jyada nirbhar karne lage. Chitrhaar, aur Sunday ko ek Film baki din raat ke 9 baje Serial, fir Sunday ko Ramayan -ya- Mahabhaarat!! Innki lokpriayta ne KhasÒaam ko Cinema-theater se [puri tarah nahi toh thoda] door toh kar hi diya tha, upar se bade-bade kalakaron ki pit-ti filmen!! ...Uunh!! Kaun faltu mein waqt aur paisa barbaad kare!! Film achhi hogi toh ghar par video mangwa kar dekh lenge__Yeh ek aam dharrna ban gayi.

Accidents aur Amitabh Bachchan ka choli-daman ka saath maloom hota hai, Apne ghar par deepawali mein patakhe-fuljhadiyon se Deewali manate waqt Amit Ji ka dayan haath (right hand) jal gaya aur Amit Ji ghayal ho gaye. Kai filmon mein Amit Ji usssi jale hue haaath par rumaal -ya- bandage baandh kar acting karte dikhe thhe. Jisme "Inquilaab" ek khaas film thi. Agar aise hi gaur kiya jaye toh aur bhi doosri filmo ki mujhe fir dubaara charcha karni padegi jao ab itna aage aakar likhna vanchhniya nahi maloom hota. Isse agar(!) batana chahen toh Amit BHaia khud hi batyenge!! Iss sansmaran-lekh-mala ko likhne ke liye mere deemaag ki kitni 'mom' pighal gayi hai yeh Main hi janta hoon, waise waqt bhi laga hai, yukti bhi lagi hai, ...par koi notice kare tab na!!
(please notice on the punctuation marks on my whole blog)

'Agnipath' ke baad ummeed thi ki shayad Amit Ji ki filme fir hame vanchhit manoranjan dengi. So hua. Uss samy South ke ek director saheb Mr. K.C. Bokadiya Hindi filmkon mein khoob kaam kar rahe thhe, unhee ki nirdeshit film 
 "Aaj Ka Arjun" 
1990 mein release hui, film mein Amit Ji ke kirdaar ka naam "Bheema" tha, Jaya Prada Ji heroine thin, Sw. Amrish Puri 'khalnayak' thhe, film chali, Lekin koi kirtimaan sthapit nahi kar saki. 

1991 mein release hui
  " -HUM- "  
...ek -'smash hit !'- Amitabh Bachchan Ka Purana maQbool Naam "TIGER" (...as was in Khoon-Paseena 1977), shandaar acting, shandaar performance, shandaar kalakaar, shandaar dialogues, shandaar script, shandaar filmankan... aeyin - '...Balle-Balle, Baija-Baija...!' Jiss-ne sabhi ki galatfahmiyon ko -smash- kar diya ki Amitabh ka jadoo khatm ho chuka hai. "...Jumma-Chumma De De..." gaane ne ek nayi bulandi hasil ki. Amitabh Bachchan puri film hi nahin hum darshakon ke dill par bhi haawi rahe. 
Iss daur mein VHS vcr/vcp Video ka jamana aa gaya tha, log cinema theater na ja kar apne gharon mein hi film dekhne lage. Cinema theater par sirf -faltuwan- ka dal-bal hi dikhne laga tha. Lekin baad mein, jagriti aani thi so aayi. 
By the way/ khair/bharhaal/haan toh main kah raha tha...
'HUM' ke baad fir wohee niraasha ka daur Amit Ji ki filme fir pitne lagin...  Mera khayal hai Amitabh Bachchan unn-mein se hain jo "_HOM -(hawan)- KARTE HAATH JALA LETE HAIN_!" BHaia Ji ne dosti khooooob nibhai, woh chahe Manmohan Desai hon, Prakash Mehra hon -ya- fir- Shashi Kapoor Sahab hon! I am sorry to say, 1991 mein Shashi Kapoor dwara nirdeshit : 
 "-Ajooba-"
flop rahi. Yeh doosri baat hai ki aapne, ya doosre ne iss-se, uss-se badi ummeeden laga rakhi thin!
fir
 "-Indrajeet"-
ka bhi bura haal hua. uff!!! Dhatt!!!
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
Fir baari aai
Last performance of Our Inspector Vijay Verma!
-Akayla-
Iss film mein muje yah bata-te hue garv hota hai ki Amitabh Bachchan ka naam VIJAY VERMA!! -Inspector Vijay Verma- Rakha gaya tha. "Keith Stevenson" naam ke ek dill-chasp videshi mool ke kalakaar ko -villain- ki bhumika di gayi thi, jinka acting, aur -Hindi- bolne ka nirala andaaz bada majedaar tha, innke kirdaar ka naam Anthony Tony Braganza tha, jo ek ajibogareeb psychopathic crimonal hai aur apne humshakal bhai Jojo ki madad se crime kar ke bachta rah-kar Inspector Vijay ke liye challenge, gusse aur baad mein inteqam ki wajah ban jata hai. Amitabh Bachchan ki shandaar acting hee iss film ki jaan hai. Main "Keith Stevenson" ki ek photo insert karta hoon---plz click on his name for more about him...
iss film mein co-stars mein Jackie Shroff, Minakshi Skeshadri thhe jo inspector Vijay ke dost hain jinka -Braganza- murder kar deta hai. Mr. Shashi Kapoor ko fir se Amit Ji ke saath dekh kar khushi hoti hai, jo iss film mein Police Commissioner bane hain, lekin unka mota sharir unke pure ... kya kahun ... par bhari hone se woh jamte nahin, unki Amit Ji ke sath tuning bhi issme thik se nahin dikhai gayi thi. Film average ...near to flop rahi. Iss film mein Amit Ji ki heroine fir -mardana=Amrita Singh thi. 

1992 mein release hui Sw. Mukul S. Aanand, jinhon-ne "HUM" banayi thi, ke dwara nirdeshti film
"_Khuda Gawaah"_  
Film se koi badi kamyabi ki ummeed thi, lekin sabhi ashankit bhi thhe ki isska anzaam bhi kahin bura na ho, par bura hi hua, _film bahut hi atishyoktipurn dang se prastut ki gayi jisske karan aam-aadmi ki samajh mein jyada kuchh aaya toh woh tha sirf action, ...bass. Film ki iss baat se nirasha hui ki Amitabh Bachchan ka maan bhang naho issliye unka kirdaar HINDUSTAN  mein ghode par swar all the way AFGHANISTAN  se aa kar HINDUSTANI police ko sharminda kar pata hai !!! Naaah...!!! yeh kisi surat mein gale utarne wali baat nahin thi, aur isske karan iss film ki kaafi aalochana hui. Baki baaton ki charcha karen toh Amit Ji ki pratibha ke Mere jaise kayal vyakti toh tarif kenge hi na! Lekin Amitabh Bachchan ko iss film ke liye Filmfare Best Actoe Award ka nomination Mere maan lene bhar se toh nhi diya gaya tha na! Amitabh Bachchan ne vastaw mein badi shandaar acting ka namuna pesh kar apni pratibha ke dum par yeh nomination hasil kiya tha, jiske ki woh haQdaar thhe. Film mein Benazir bani Sridevi ke saath unki jodi khoob jami. Haan ji music kamzor tha. Badshah Khan ke roop mein Amit Ji ka look aur getup shandaar tha, Mujhe khoob pasand aaya.
Par film chali nahin.

Iske baad ... AMITABH BACHCHAN gumnaam se ho kar gayab ho gaye.
...jaise sanyaas le liya ho !!!
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ab meri kahani

MAIN KABHI BRILIYANT STUDENT NAHI RAHA!
1984 se 1988 tak Maine Apne career ke liye jaanmaari karne mein lagaye, Issi duran Patna ke 'Ram Manohar Rai Seminary' School _Khjanchi Road, Patna (1884-1985) Jijajee ke yahan rah kar, -fir- 'Delhi Publick College of Competitions',  _5-B, Pusa Road _New-Delhi (1985) ek hostel mein rah kar -fir- 'Premier Medicacl Coaching Institute'_Khajanchi Road, Patna (1986- punah: Jijajee ke yahan rah kar-1987) mein dakhila le-le kar Pre-Medical-Competitions ki taiyari karne laga, issi duraan Babuji se patrachaar ka mujhe khoob anubhav hua, Babuji harek saptah mujhe chitthi likhte thhe. Main bahar tha tab Babuji mujhe aur Main Babuji ko bahut miss karta thhe.
...1986 ki Deepawali mein Lohardaga mein 'aatishbaji'/patkhe/firecrackers se Mera bhi dahina haath (panja/palm) buri tarah jhulas gaya, aur Main Medical compititive Exam mein nahin baith saka , Meri badkismati. Lekin New-Delhi ki padhai ne mujhme kaafi fark paida kar diya tha jiske karan meri performance mein ek ummeed jagmagane lagi thi, shayad maine Dilli chod kar galati ki!...aur mujhe sachchai ka eshsaas ho gaya tha.

[-ASAFALTA KEVAL YEH SIDDH KARTI HAI KI SAFALATA KE LIYE PURI KOSHISH NAHIN KI GAYI THI ! Kisi bade aadmi ne hi kaha hoga. Shayad JIJAJEE!!!-] 

Maine Lohardaga B.S.College mein B.Sc. mein admission le kar aage ki padhai jari rakhi. Maine apna khud ka vyawasay/business karne ka faisla kiya, lekin kuchh doston ne mana kar diya. 1988 mein Maine Patna ke ek coaching institute 'ACCENT' se English language ko seekhne ki bhi koshish ki, issi coaching institute mein Meri mulakaat Rajeev aur Shashidhar se hui jo Mere pakke dost ban gaye. Rajeev ke bade bahia Ranchi University mein Hindi ke Professor thhe jinka Baryatu mein Quaeter tha. Rajeev ne mujhe B.Sc.Hons. Ranchi se karne ki salah di. Maine Ranchi University mein admission lekar B.Sc Hons. ki padhai jari rakhi. Issi duran 1989 mein Meri shadi ho gayi. Aur Maine apne Sw.Puj. Babuji ke Nav-Nirmit Makaan New Road Lohardaga mein 'VEENA VASTRALAYA' naam se ek retail ready-made kapde ki dukaan khol kar business aur padhai saath-saath karne laga.B.Sc.Hons. ka result pure parivaar mein khshiyan le kar aaya. Business men Mera mann lagne laga, aur 05,JULY`1990 ko Hamare pratham Putra -Pritish- (-jimmy-) ka janam hua. MAIN PAINTING BAHUT ACHHA KAR LETA HOON. Wife hospital mei thi tabhi antcipation mein Maine ek hypothetical child's painting banai..._ must be jimmy_...
...here is the painting...
Kahte hain shaadi hone par Pati ke saath uski Patni ke bhagya bhi jud jata hai, toh aisa hi santaan ke janam lene se bhi toh hona man-na chahiye na! Ab parents ke saaath unke child ka bhgya bhi jud gaya.  

Yeh Mere jeewan ki tab tak ki aakhir khushi thi, shayad issiliye khoob dhoom se manayi gayi.
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Lekin prarabdh toh atal hai na! 
THE FATE IS INEVITABLE!!! 
'brain tumer -turned- brain cancer ki wajah se
06,September`1993 ko Mere BABUJI Mar gaye!
Mere Babuji Mar Gaye -Amit Ji-! 
Mere Babuji
Mar Gaye!!





...jari..